अपराध न्याय तंत्र का जज्बा ऐसा रखें कि जरायम जमींदोज हो जाए: सागर

विशेष संवाददाता
भोपाल,16 मार्च। मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी एवं एफएसएल के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न हुई। जिसमें राज्य के उच्चतर न्यायिक सेवा के 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीसी सागर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवायें तथा अध्यक्षता एसके शर्मा जिला एवं सत्र न्यायाधीश सागर द्वारा की गई। उक्त कार्यक्रम का संयोजन एफएसएल सागर के संचालक डॉ हर्ष शर्मा द्वारा किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुये एडीजी डीसी सागर ने व्यक्त किया कि वर्तमान भौतिक और तकनीकी युग के समाज में अपराधियों द्वारा सुनियोजित और योजनाबद्व तरीके से ऐसे अपराध किये जा रहे है, जिससे कि बिना तकनीक और विज्ञान का सहारा लिये ऐंसे अपराधों का ना तो उचित अनवेषण संभव और ना ही पीडित को उचित न्याय दिलाने और अपराधों की रोकधाम में समाज को संदेश देने की मंशा ही पूरी हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में उचित और वैज्ञानिक तरीके से किये जाने वाले अनुसंधान में एफएसएल वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके द्वारा किये गये वैज्ञानिक तरीके से किये गये अन्वेषण के आधार पर जब न्यायालय किसी उचित निष्कर्ष पर पहुचता है तभी हम समाज में साबित कर पाते है कि कोई भी निर्दोष सजा का भागीदार नहीं होगा और कोई भी दोषी जेल की सलाखों से बाहर नहीं रह पायेगा।
उन्होंने कहा कि राष्टीय स्तर पर लंबित प्रकरणों में से जहां राष्ट्र के अन्य प्रदेशों मेे निराकृत प्रकरणों का प्रतिशत 12.6 है वहीं मप्र में 20.9 प्रतिशत है जिससे यह दर्शित हेाता है कि पुलिस वैज्ञानिक चिकित्सक एवं न्यायिक संस्था के कर्मियों के समन्वयिक प्रयासों और अथक परिश्रम के कारण इतनी मात्रा में प्रकरणों का निराकरण संभव हो पा रहा है।
उक्त कार्यशाला के अध्यक्षी उदबोधन में जिला न्यायाधीश एसके शर्मा ने अभिव्यक्त किया कि तीन दिन की कार्यशाला में एफएसएल सागर के दक्ष विशेषज्ञों द्वारा दी गयी जानकारी से निश्चित तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे न्यायिक अधिकारीगण लाभांवित होंगे और वर्तमान में बढती हुई तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहभागिता के वातावरण में उससे संबंधित तकनीक के आधार पर निष्कर्षित साक्ष्य सामग्री का आश्रय लेकर न्यायिक अधिकारी उचित निर्णय पारित कर सकेंगें जिससे कि समाज में जो न्यायिक संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा और विश्वास है वह कायम रहेगा। उक्त कार्यशाला केा न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों में से डॉ अनिल सिंह, डॉ राज श्रीवास्तव, डॉ स्वाति श्रीवास्तव, डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ प्रशांत भटट, डॉ प्रमोद नागर, डॉ एके बडोन्या, डॉ एसके वर्मा, डॉ पंकज, डॉ हीरक रंजन दास, संबोधित किया। उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम के समन्वयक डॉ राज श्रीवास्तव, न्यायाधीश अमित सिंह सिसोदिया, सागर सीजेएम संजय चौहान का अभूतपूर्व योगदान रहा।