चारा घोटाले में सबसे बड़ी सजा

पटना, 25 मार्च। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के चौथे मामले में अबतक की सबसे बड़ी सजा, सात-सात साल की कैद और तीस-तीस लाख के अर्थदंड के रूप में सुनाई गई है।
इस मामले में उन्हें सोमवार को रांची की सीबीआइ की विशेष अदालत ने दोषी कऱार दिया था और शनिवार को उन्हें सजा सुनाई गई। बता दें कि इससे पहले ही लालू यादव पांच साल की सजा भुगत रहे हैं। ताजा फैसला यानी दुमका कोषागार का यह घोटाला 22 साल पुराना है। इस मामले में सीबीआई ने साल 2000 में 48 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। बता दें कि इस केस में ट्रायल के दौरान 14 लोगों की मौत हो गई थी। दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच गैर-कानूनी तरीके से 3.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इस मामले में सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई। 30 सितंबर 2013 को कोर्ट ने लालू यादव को दोषी माना। पांच साल जेल की सजा हुई। 25 लाख रुपए का जुर्माना भी उन पर लगाया गया था। 23 दिसम्बर 2017 को दोषी करार। 6 जनवरी 2018 को लालू समेत 16 आरोपियों को साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई गई। लालू पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। मार्च 2018 में लालू यादव को दोषी माना गया। पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र बरी हुए। 24 मार्च को लालू को 7-7 साल की सजा सुनाई गई। दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी। यानी कुल 14 साल। लालू पर 60 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।