पहले शपथ लो , राजनीति में नहीं जाओगे

नई दिल्ली, 25 मार्च। 7 साल बाद समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठ गए हैं। आज अनशन का दूसरा दिन था। वह किसानों के मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
अन्ना ने पहले ही दिन यह साफ कर दिया कि आम आदमी पार्टी समेत किसी भी राजनीतिक दल के नेता, सदस्य, कार्यकर्ता या समर्थक उनके आंदोलन के मंच पर नहीं आ सकते। बताया जा रहा है कि इस सत्याग्रह के आयोजन के लिए बनाई गई 26 सदस्यों कोर कमेटी के प्रत्येक सदस्य से 100 रुपये के स्टांप पेपर पर यह लिखकर साइन करवाए गए हैं कि वे किसी भी राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस आंदोलन से नहीं जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही यह भी लिखवाया जा रहा है कि वे लोग आजीवन न तो खुद कोई पार्टी बनाएंगे और न ही किसी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
बताया जा रहा है कि इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए दूसरे राज्यों में बनाई गई कमिटियों के भी साढ़े 6 हजार से ज्यादा सदस्यों ने इसी तरह का हलफनामा अन्ना को भेजा है। आंदोलन में शामिल हो रहे किसानों के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है। शुक्रवार से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने से पहले अन्ना सुबह 9 बजे राजघाट गए और बापू को श्रद्धांजलि दी। वह करीब आधा घंटा रुके। इस दौरान उनके कुछ समर्थक भी मौजूद थे। मंच के बैकग्राउंड में जो बैनर लगाया गया है, उस पर सिर्फ गांधी जी तस्वीर है। इस आंदोलन को अन्ना ने ‘जन आंदोलन सत्याग्रहÓ नाम दिया है। बैनर पर सक्षम किसान, सशक्त लोकपाल और चुनाव सुधार जैसी तीन प्रमुख मांगें भी लिखी हुई हैं। भारतीय किसान यूनियन समेत देश के कई दूसरे किसान संगठनों ने अन्ना के इस आंदोलन को समर्थन दिया है। अन्ना का अनशन कब तक चलेगा, यह अभी साफ नहीं है। रामलीला मैदान में माहौल जनलोकपाल आंदोलन के समय जैसा नहीं है। फिर भी देश के कई हिस्सों से 5 हजार से ज्यादा किसान पहले दिन रामलीला मैदान पहुंच चुके हैं। अन्ना हजारे ने अपने आंदोलन के पहले ही दिन अपना इरादा साफ कर दिया है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को कृषि मंत्री उनसे मिले थे। अन्ना के मुताबिक, उन्होंने कृषि मंत्री से साफ कह दिया है कि उन्हें आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी, तब तक हम डटे रहेंगे। उनकी सबसे प्रमुख मांग स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और किसानों का कर्ज माफ करने से संबंधित हैं।