स्वच्छता के दावों की छात्रावासों में खुल रही पोल

रायसेन, 7 अप्रैल। जिले में स्वच्छता के बड़े बड़े किए जाने वाले सरकारी छात्रावासों में फैल होते हुए नजर आ रहे है। जिले में छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी छात्रावासों में नियमित रूप से साफ सफाई ना होने की वजह से बीमारियों की चपेट में आ रहे है। हद तो तब हो जाती है जब रायसेन जिला मुख्यालय पर आला अधिकारियों के होने के बाद भी स्वच्छता का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। रायसेन मुख्यालय के राहुल नगर में स्थित 100 सीटस पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में शौचालयों की साफ सफाई नियमित नहीं होने की वजह से छात्र परेशानी का सामना कर रहे है और छात्रावास के अधीक्षक अनदेखी कर है। इस छात्रावास में पानी तक का उचित इंतजाम ना होने की वजह से छात्रों ने नाम ना छापने की शर्त में बताया कि शौचालय टूट फूट गए है और नियमित साफ सफाई तक नहीं की जा रही है। जब पड़ताल की गई तो छात्रावास में करीब 20 विद्यार्थी 100 कलाम के अलावा आईटीआई के भी निवास करते है। जिनकी दयनीय हालत जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा देखने के बाद भी अनदेखी की जा रही है। इसी तरह जिला मुख्यालय के अन्य संचालित होने वाले छात्रावासों के हालात में कुछ इस तरह नजर आ रहे है। जहां छात्रावासों के आसापास गदंगी का अम्बार होने की वजह से मच्छरों का आंतक बना हुआ है। लेकिन साफ सफाई की सुध तक नहीं ली जा रही है।
2 साल में जगह जगह क्षतिग्रस्त हुआ छात्रावास:- छात्रावास के निर्माण के दौरान घटिया सामाग्री लगाए जाने के दौरान छात्रावास का भवन दो साल में ही दम तोडऩे लगा है। जहां जगह जगह भवन क्षतिग्रस्त होता हुआ नजर आ रहा है। इस 100 सीट्स पोस्ट मैट्रिक छात्रावास का लोकार्पण क्षेत्रीय विधायक एवं वनमंत्री डॉ.शेजवार एवं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति अनीता किरार द्वारा 16 मई 2016 को किया गया। लेकिन छात्रावास के भवन की देखरेख सही तरीके से नहीं किए जाने के चलते छात्रावास का भवन 10 साल से अधिक पुराना दिखने लगा है और समय रहते भवन का रखरखाब नहीं किया गया तो भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाएगा। जबकि लाखों रूपए खर्च करने के बाद इस छात्रावास का निर्माण शासन द्वारा विद्यार्थियों के लिए करवाया गया था।
बाउण्ड्री ना होने से असुरक्षित विद्यार्थी:- राहुल नगर में स्थित छात्रावास में बाउण्ड्रीवाल निर्माण का बजट पीडब्लूडी के पास होने के बाद भी बाउण्ड्रीवाल का निर्माण नहीं हो पाया है और यह मामला सीमांकन में उलझा हुआ है। वहीं बाउण्ड्रीवाल का निर्माण समय पर ना होने की वजह से छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी भी असुरक्षित है।