सहकारी बैंकों की हङ़ताल से किसान परेशान

बैरसिया, 12 जून। एक तरफ कृषकों को फसल की प्रोत्साहन राशि वितरण करने का कार्यक्रम 10 जून को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा आयोजित किया जाता है वहीं दूसरी ओर 11 जून को ही सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के कर्मचारी बैंक में ताला लगाकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाते हंै।
बैंक की हङ़ताल और कृषकों के पस्त हाल को जानने के लिये राष्ट्रीय हिन्दी मेल की टीम बैरसिया पहुंची तो देखा कि बैंक की हङ़ताल से कृषक दो दिन हुई वर्षा के पश्चात फसल बुआई हेतु खाद-बीज व अन्य सामग्री का प्रबंध करने हेतु बैंक से पैसा निकालने के लिये आये हुये थे लेकिन बैंक की इस हङ़ताल से उनकी फसल बुआई की सामग्री का प्रबंध बैंक की हड़ताल की भेंट ही चढ़ती नजर आयी। बैंक की हङ़ताल से निराश कृषकों ने एसडीएम कार्यालय पहुंच चक्काजाम करने का प्रयास तो किया किंतु प्रशासन ने कृषकों को चकमा देकर इसे असफल कर दिया। ज्ञातव हो कि शासन से सातवें वेतनमान व अन्य मांगों को लेकर को-ऑपरेटिव बैंक कर्मचारियों की यह हङ़ताल पूर्व-नियोजित थी किंतु मुख्य प्रश्न यह है कि कृषकों का फसल-मूल्य से लेकर प्रोत्साहन राशि या यह कहा जाए कि कृषक का सम्पूर्ण लेन देन इसी सहकारी बैंक से होता है तब क्या कृषक फसल बुआई के इस बहुमूल्य व सीमित समय को बैंक की हङ़ताल को खत्म होने की संभावनाओं में ही नष्ट कर ले। सीहोर से कृषकों को फसल की प्रोत्साहन राशि के वितरण के शुभारंभ की घोषणा करने वाले शासन को क्या बैंक कर्मचारियों की पूर्वनियोजित इस हङ़ताल की सूचना नहीं थी। तब क्या कृषकों की जरूरतों का शासन को पता नहीं है। अंतत: निष्कर्ष यह ही है कि अगर शासन द्वारा बैंक कर्मचारियों की मांगो ंको पूर्ण कर यह हङ़ताल शीघ्र ही खत्म नहीं करवायी गयी तो निश्चित रूप से कृषकों के फसल बुआई का यह बहुमूल्य समय नष्ट हो जावेगा और एक बार पुन: कई कृषक चौपट हो आत्महत्या को विवश होने लगेंगे।