सैनिटरी नैपकिन, राखी पर नहीं लगेगा जीएसटी: गोयल

नई दिल्ली, 22 जुलाई। जीएसटी काउंसिल की शनिवार को हुई 28वीं बैठक में सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी से बाहर करने का फैसला हुआ है। अब सैनिट्री नैपकिन पर जीएसटी की दर को शून्य कर दिया गया है। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री का कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल ने की। बैठक बाद में वित्तमंत्री ने ट्वीट कर जानकारी दी कि बैठक में देश की 125 करोड़ की आबादी की सुविधाओं को देखते हुए फैसले लिए गए हैं। साथ ही पारदर्शिता बरतने की कोशिश की गई है। बैठक में तकरीबन 35 से ज्यादा उत्पादों पर जीएसटी रेट घटाए गए हैं। छोटे शिल्पकारों के उत्पादों पर भी जीएसटी घटाकर शून्य फीसदी कर दिया गया है। मार्बल, लकड़ी के उत्पाद, राखी, दोना, झाड़ू आदि पर जीएसटी शून्य फीसदी कर दिया गया है। वहीं हैंडलूम की दरी, 1000 रुपये से कम की टोपी पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इसके साथ ही 25 इंच तक का रंगीन टीवी अब सस्ता हो जाएगा। इस पर जीएसटी अब 28 से घटाकर 18 फीसदी किया गया है। वहीं किसानों के इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, लीथियम आयन बैट्री, वैक्यूम क्लीनर, ग्राउंड, जूसर, शेवर, वाटर हीटर, इलेक्ट्रिक आयरन पर भी जीएसटी घटाया गया है। वहीं पेंट, वार्निश, फ्रिज, वाटर कूलर, आइसक्रीम फ्रीजर, टॉयलेट क्लीनर आदि पर भी जीएसटी कम किया गया है। वहीं बांस फ्लोरिंग से बनी चीजें पर जीएसटी 18 से घटाकर 12 फीसदी पर लाया गया है। इथेनॉल तेल कंपनियों को बेचा जाने पर जीएसटी 18 से घटाकर 5 फीसदी किया गया है। अब 1000 रुपये तक के फुटवियर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा, पहले यह सीमा 500 रुपए ही थी।
लंबे समय से हो रही थी मांग : सैनिट्री नैपकिन पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने का भारी विरोध हो रहा था। सैनिट्री नैपकिन पर जीएसटी हटना महिलाओं के लिए बेहद बड़ी राहत की बात है। कई महिला संगठन काफी समय से सैनिट्री नैपकिन पर जीएसटी घटाने या कम करने की मांग कर रहे थे।
रिटर्न प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: अब पांच करोड़ तक से टर्नओवर का टैक्स हर महीने जमा होगा, लेकिन रिटर्न 3 महीने में 1 बार देना होगा। इससे देशके 93 प्रतिशत कारोबारियों को फायदा होगा। वहीं सरकार ने रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म सितंबर 2019 तक के लिए स्थगित कर दिया है। साथ ही एक्जंप्शन लिमिट 10 से बढ़ाकर 20 लाख कर दी गई है। कोई टैक्स देने वाला चाहे तो एक से ज्यादा रजिस्ट्रेशन एक राज्य में ले सकते हैं लेकिन टर्नओवर एक साथ जोड़ा जाएगा। ई-कॉमर्स कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन लेना होगा जहां उनपर टैक्स बनता है। रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने के लिए अब जिस दिन आवेदन करेंगे, उसी दिन से रिटर्न की प्रक्रिया बंद हो जाएगी। पहले कारोबारियों को रिटर्न भरते रहना होता था।