जन आशीर्वाद यात्रा : सबको पीछे छोड़ते शिवराज

निलय श्रीवास्तव
मन की जिज्ञासाएं अनंत हैं । कई बार मन में यह सवाल उठता है कि राजनेता का चाल, चरित्र कैसा होना चाहिये। क्या वह सबसे पहले अपने बारे में सोचे या फिर प्रदेश की जनता को विकास से जोडऩे के लिए संघर्षरत हो जाये। इन्हीं सवालों के बीच शिवराजसिंह चौहान जैसे आम आदमी का चेहरा आँखों के सामने उभर आता है जिसने प्रदेश के पिछड़े तथा उपेक्षित वर्ग की हर संभव मदद की। 13 वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री बनने से लेकर अब तक हर समय सिर्फ प्रदेश की भलाई के लिये काम किये । निश्चित रूप से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जमीन से जुड़े राजनेता हैं।
किसान परिवार में जन्में तथा अभावों में पले-बढ़े शिवराज गरीब और बेसहारा वर्ग की पीढ़ा को भलीभंाति समझते हैं । यही वजह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही प्रदेष की उन्नति के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं समर्पित करते रहे हैं। याद रहे कि डेढ़ दशक पहले जब मध्यप्रदेश काफी पिछड़ा और बीमारू राज्य था तब शिवराज के सामने अनेक चुनौतियाँ थीं। वे उन पर खरे उतरे और मध्यप्रदेश को बीमारू तथा पिछड़े राज्य की श्रेणी से बाहर लाकर शीर्ष पर पहुँचाया। मध्यप्रदेश में जनहित में विभिन्न योजनायें क्रियान्वित कर विकास को आधार बनाकर पूरी मुस्तैदी से काम करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विगत् 14 जुलाई को जन आशीर्वाद यात्रा आरम्भ की थी। पहले काम और फिर अब जनता के बीच पहुँचकर उसका स्नेह प्राप्त करना, यह अभिनव प्रयास केवल मध्यप्रदेश में ही होता दिख रहा है ।
समाज के सभी वर्गों के प्रति चिंता का प्रतिफल है कि प्रदेश भर में निकल रही उनकी जन आशीर्वाद यात्रा को भरपूर प्रतिसाद मिल रहा है। कोख में मार दी जाने वाली बेटियां आज आंगन में चहक रही हैं तो उन योजनाओं के कारण जिसने मां-पिता के सिर से बोझ कम कर दिया है। कम उम्र में विवाह का बंधन ढीला पड़ रहा है तो इन्हीं योजनाओं के कारण। उपकार मान रहे हैं समाज के सभी आयु वर्ग और पेशे के लोग जिनके जतन के लिए शिवराज सरकार ने योजनाओं का श्रीगणेश किया। जन आशीर्वाद यात्रा में उन बुर्जुगों का आषीश इसलिए भी शिवराज को फलदायी हो रहा है कि उन्होंने तीर्थदर्शन के लिए एक अनोखी पहल की। इन बुर्जुगों की नजर में शिवराज मुख्यमंत्री नहीं, उनके लाड़ले हैं। कोई मुख्यमंत्री या सरकार ऐसी चिंता करती है क्या? नहीं, लेकिन शिवराज सिंह सरकार ने किया। जन आशीर्वाद यात्रा शिवराज सिंह सरकार के 13 वर्षों की उस विकास यात्रा का एक पड़ाव मान सकते हैं जहाँ वे उन समस्याओं को देखने की कोशिश कर रहे हैं जो अब तक छूट गयी हैं। वे अपनी कोशिश में कोई कमी नहीं रखना चाहते हैं। जनता और प्रदेष की सेवा में जुटा एक मुख्यमंत्री राजनेता हो सकता है लेकिन जन आशीर्वाद यात्रा लेकर निकला एक किसान का बेटा है, प्रदेश का लाड़ला नेता है क्योंकि एक बार फिर प्रदेश की जनता उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाने के लिए बेताब है। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में जन आशीर्वाद यात्रा के पहुँचने पर मिल रहे समर्थन और सहयोग ने सरकार पर अपना विश्वास जताया है। संबल योजना के तहत मिल रहे लाभ, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं तथा महिला सशक्तिकरण और उसे सहारा देने के लिए उठाये गए ऐतिहासिक कदम से आमजन में संतोष व्याप्त है। जन आशीर्वाद यात्रा में अपने प्रिय मुख्यमंत्री का स्वागत, वंदन-अभिनंदन करने पहुँचे लोगों का कहना है कि उन्हें अब अपने घर का सपना सच होता प्रतीत हो रहा है। अपने 13 साल के कार्यकाल में शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री के रूप में मध्यप्रदेश को नयी पहचान दी है। पूरे देश में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य के रूप में गिना जाने लगा है। मध्यप्रदेश में मजदूर और गरीब तबका अब उपेक्षित नहीं रहेगा। मजदूरों की गर्भवती महिलाओं के लिए जो सहायता दी गयी उससे सरकार का मानवीय चेहरा उभरकर सामने आया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसान पुत्र हैं। प्राकृतिक आपदाओं के चलते तथा अल्प वर्षा के दौरान किसानों को किन कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है, यह उन्हें भलीभांति पता है। किसानों को हर संभव सम्पन्न बनाने के लिए वे हर समय चिंतित रहते हैं। किसान और गरीब मजदूरों की पीड़ा उनके इन शब्दों में साफ झलकती है – ”असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के साथ हमेशा यह विडंबना रही है कि कोई भी परेशानी आ जाये पर उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्राप्त नहीं होती। बीमार पडऩे अथवा घर में प्रसव होने पर उन्हें बहुत अधिक आर्थिक कष्ट झेलना पड़ता है क्योंकि इन हालातों में वे काम पर नहीं जा सकते । उनके बच्चे भी अभावों में शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर मध्यप्रदेश सरकार ने मजदूरों की भलाई के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं, जिससे मजदूरों को पर्याप्त सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में बतौर मुख्यमंत्री सर्वाधिक कार्यकाल पूरा करने वाले शिवराज सिंह चौहान इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो गये हैं । प्रदेश की करोड़ों जनता के दिलो-दिमाग में अपनी अमिट छाप छोडऩे वाले शिवराज सिंह का राजनीतिक सफर अविस्मरणीय और अकल्पनीय है । कहा नहीं जा सकता कि यह सौभाग्य कभी किसी और को मिल पाएगा । जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान रथ लेकर पहुँचने पर जो स्नेह और प्रेम उन्हें मिल रहा है वह राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की नींद उड़ाने के लिये काफी है । शिवराज की झलक पाने, उनके लिये मंगल कामना करने तथा आने वाले चुनाव में फिर से उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखने के लिये लोगों का कारवंा बढ़ता ही जा रहा है । मौसम के हर मिजाज से बेपरवाह होकर लोग आशीर्वाद देने के लिये कतार लगाये, टकटकी बांधे चाक-चौबारे पर शिवराज सिंह की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अपने जननायक की एक झलक पा लेने की ललक मध्यप्रदेश में हुए विकास कार्यों की गाथा और शिवराज सिंह की सफलता की कहानी सुना रहे हैं । जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान आने वाले समय में वे देष के लिए शहीद होने वाले वीर जवानों के घर जाएंगे। उनके परिवार के सम्मान में उनके साथ खड़े होंगे। उनका यह प्रयास नौजवानों के भीतर देषप्रेम की भावना को और बढ़ाएगा। वैसे भी बीते 13 सालों में मध्यप्रदेश ने वीर शहीदों की याद में जो कुछ किया है, वह अतुलनीय है, वंदनीय है और स्मरणीय भी। भोपाल का शौर्य स्मारक वीरों का स्मरण करता है। शौर्यस्मारक सा कोई दूसरा देश में नहीं। यह मुख्यमंत्री के रूप में षिवराजसिंह चौहान की पुण्यायी है।