राजधानी के मंदिर में समाहित हुआ ज्योतिर्लिंग का अंश!

दीपिका राठौड़
भोपाल, 21 अगस्त। सावन के महीने में एक ओर जहां बारिश की फुहारों के बीच मौसम खुशनुमा बना हुआ है वही दूसरी ओर भक्तगण शिव आराधना में डूबे हुए हैं । सावन मास को महादेव का महीना माना जाता है, मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शंकर की अगर पूजा की जाए तो वे प्रसन्न होकर मनचाहा फल प्रदान करते हैं। मान्यता है कि अगर किसी भी शिव मंदिर में लगातार तीन साल बिना खंडन के रूद्वाभिषेक किया जाए तो उस शिवलिंग में ज्योतिर्लिंग का अंश समाहित हो जाता है, ऐसा ही एक मंदिर हैं भोपाल शहर में नौ दुर्गा के मंदिर प्रांगण में बना अष्टमुखी शिव मंदिर, जो की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
यहां के पुजारियों का दावा है कि लगातार तीन साल से अनवरत शिवलिंग का रूद्राभिषेक किया जा रहा है जिसके बाद इस शिवलिंग में भी भगवान के ज्योतिर्लिंग का अंश समाहित हो चुका है। यहाँ पर वैदिक कर्मकांडी ब्राह्मणों द्वारा नित्य रुद्राभिषेक किया जाता है। श्रावण मास के चौथे सोमवार पर इस मंदिर में भक्तों का मेला लगा रहता है। ओम नम: शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच लोग दूध व जल से भोलेनाथ का अभिषेक करने के साथ ही पुष्प, बिल्व पत्र और धतूरा आदि अर्पित कर पूजा-आरती करते हैं।
व्यवस्थापक के अनुसार धर्माचार्यों और वेदों के अनुसार जिस शिवलिंग का 3 वर्ष नित्य रुद्राभिषेक किया जाता हैं वहां पर भगवान स्वयं विराजमान होकर सभी भक्तों को मनवांछित फल प्रदान कर मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। यहां पर भक्त अपने जन्मदिवस पर, अपनी वैवाहिक वर्षगांठ पर, माता पिता के जन्म दिवस पर, बच्चों के जन्म दिवस एवं पूर्वजों की पुण्यतिथि पर रुद्राभिषेक करते हैं। इस रुद्राभिषेक को प्रारंभ करने का उद्देश्य मनुष्य की धर्म के प्रति रुचि को बरकरार रखना और धर्म के रास्ते पर ले जाना है ।
मंदिर के पुजारी देवेन्द्र ने बताया कि श्रावण मास के अवसर पर यहां पर भगवान का नित्य विशेष अभिषेक प्रारंभ है। श्रावण मास के प्रति सोमवार को भगवान को 1008 बेलपत्र चढ़ाकर सहस्त्रार्चन किया जाता है। प्रथम और द्वितीय श्रावण सोमवार को भगवान पशुपतिनाथ का गो दुग्ध से और तृतीय सोमवार को भगवान का गन्ने के रस से रुद्राभिषेक किया गया। आज श्रावण के आखिरी सोमवार को 21 लीटर दुग्ध और 1008 बेलपत्र से सहस्त्राचन किया गया।