श्रद्धेय अटल जी को रमन सिंह ने अर्पित की गुरु दक्षिणा…

ििवशेष संपादकीय/विजय कुमार दास

छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जाति से राजपूत और वर्ण क्षत्रिय के बड़े नामों में देश में उनका नाम है, परंतु उनके कुलदेव भगवान राम या भगवान शिव शंकर या जय हनुमान हैं, इस बात को केवल वे ही जानते हैं। उनका यह पक्ष जीवन की धार्मिक आस्था का प्रतीक हो सकता है, परंतु उनके राजनीतिक गुरु कौन हैं, इस सवाल का उत्तर छत्तीसगढ़ की जनता को आज उस समय मिल गया, जब डॉ. रमन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल के फैसलों में पूरे छत्तीसगढ़ को पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम लिख दिया। सूत्रों का कहना है कि जब तक अटल जी जीवित थे, तब तक डॉ. रमन सिंह अटल जी को लेकर अपने राजनीतिक जीवन में वे क्या-क्या उनके नाम कर सकते हैं, इसकी योजना वे रोज बनाते थे। और तो और जिस दिन अटल जी इस दुनिया से विदा हुए, उस दिन से लेकर आज तक डॉ. रमन सिंह बताते हैं कि ठीक से सोए नहीं हैं। चैन से नहीं सोने का कारण यह नहीं था कि डॉ. रमन सिंह अटल जी के जाने के बाद परेशान थे, बल्कि यूं कहा जाए कि डॉ. रमन सिंह ने 16 अगस्त शाम 5 बजकर 5 मिनट पर जब यह खबर सुनी कि अटल जी नहीं रहे, उसी क्षण समूचे छत्तीसगढ़ का नक्शा डॉ. रमन सिंह के सामने आया होगा और उन्होंने तय कर लिया होगा कि अपने सबसे बड़े राजनीतिक गुरु को उनकी शिक्षा-दीक्षा के बदले क्या-क्या गुरु दक्षिणा में समर्पित करेंगे। संपादक होने के नाते मुझे इस बात की पुख्ता जानकारी है और मैं इस बात का गवाह भी हूं कि जब डॉ. रमन सिंह केन्द्र में उद्योग राज्यमंत्री थे, तब एक दिन मुझे उन्होंने अपने निवास पर लंच पर बुलाया था और जब वे लंच पर मंत्रालय से लौटकर आए और खबर सुनाई कि अटल जी ने छत्तीसगढ़ भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनने का आदेश दिया है और मंत्रिमंडल से मुक्त कर दिया है। डॉ. रमन सिंह का यह वाक्य सुनते ही थोड़ी-सी निराशा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह को हुई, लेकिन जब मैंने कहा कि गुरु का आदेश मानकर यदि डॉ. रमन सिंह प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनना स्वीकार करते हैं तो यह मानकर चलिए भाभी जी कि डॉक्टर साहब अब छत्तीसगढ़ के भविष्य बनेंगे और उन्हें मुख्यमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकेगा। वह क्षण सच साबित हुआ, डॉ. रमन सिंह अपने गुरु अटल बिहारी वाजपेयी की कृपा और आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ में 15 साल से लगातार मुख्यमंत्री हैं और चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का उनका सपना हो या न हो लेकिन डॉ. रमन सिंह के अटल जी जरूर चाहेंगे कि भाजपा चौथी बार भी रमन सिंह के नेतृत्व में सत्ता में आए और अटल जी का नाम पूरे छत्तीसगढ़ में हर नौजवान की जुबान पर कुछ इस तरह लाएं कि समूचा छत्तीसगढ़ अटल जी को 7 पीढिय़ों तक भूल नहीं पाए। शायद इसी सोच के चलते डॉ. रमन सिंह ने मंत्रिमंडल के फैसले में राजनादगांव का मेडिकल कालेज सबसे पहले अटल जी के नाम कर दिया। मंत्रिमंडल के फैसले में नया रायपुर, बिलासपुर विश्वविद्यालय, सभी बड़े संस्थान, मड़वा ताप बिजली परियोजना, रायपुर शहर एक्सप्रेस वे, फिल्म विकास निगम, गरीबों को 40 यूनिट मुफ्त बिजली और स्कूलों में बच्चों को अटल जी की जीवनी पढ़ाने का निर्णय तथा अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से राष्ट्रीय पुरस्कार, जिसमें सबसे पहला हक किसी पत्रकार का निश्चित होगा, क्योंकि अटल जी की जिंदगी एक पत्रकार के रूप में शुरू हुई थी, इस बात को डॉ. रमन सिंह अच्छी तरह जानते हैं, इस तरह के फैसले का मतलब है कि डॉ. रमन सिंह ने अपने राजनीतिक गुरु श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को गुरु दक्षिणा में वह सब कुछ समर्पित कर दिया, जिसे उन्होंने आज तक अर्जित किया था। यह अदना-सा संपादक अपेक्षा करता है कि अब
छत्तीसगढ़ आगे बढ़े, कहने की जरूरत किसी को नहीं पड़ेगी और श्रद्धेय अटल जी के नाम पर डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ राज्य की ऐसी काया पलटेंगे कि अब कोई छत्तीसगढ़ में न बेघर होगा और न ही बेरोजगार होगा।
डॉ. रमन सिंह ने अटल जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा था कि ‘भारत के चमकते हुए सितारे का अंत हो गया है, हम कहते हैं कि अटल जी की याद में यदि छत्तीसगढ़ चमक जाए तो अटल जी के नाम का सितारा हमेशा-हमेशा चमकता ही रहेगाÓ।