तीज-त्यौहारों से हरियाली गायब 

ग्रामीण विकास विभाग में बैठने वाली एक महिला आईएएस अधिकारी मानती हैं कि बाजारों से तीज-त्यौहारों की हरियाली गायब हो चुकी है। पहले तीज-त्यौहारों में बाजारों पर रौनक हुआ करती थी, खासकर ग्रामीण अंचलों में त्यौहारों को लेकर लोगों में उत्साह हुआ करता था, नोट बंदी के बाद आनंद से मनाए जाने वाले तीज-त्यौहार का महत्व घटने लगा है। उक्त अधिकारी का मानना है कि पुरानी संस्कृति को बनाए रखने के लिए त्यौहारों का मनाया जाना आवश्यक है, लेकिन गांव में नोटबंदी का ऐसा असर दिखाई देने लगा है। यदि पुरानी संस्कृति में बदलाव आया तो विदेशी सभ्यता का चलन पूरी तरह हावी हो जाएगा। तीज-त्यौहारों की रौनक वापस लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने की जरुरत है, तीज-त्यौहारों की चमक के घटने से युवा पीढ़ी अपने संस्कार भूल बैठेगी, जिसे वापस लाना संभव नहीं होगा।              … खबरची