कॉलेज की लड़कियों ने हंसना छोड़ दिया था, ऐसी थी अभिनेत्री साधना

अशोक मनवानी
हिंदी सिनेमा में यदि राजेन्द्र कुमार सुपर स्टार थे तो साठ, सत्तर के सालों की सुपर अदाकारा साधना थीं, भारत मे फैशन प्रवर्तन वे ही करती थी। हर फिल्म सिल्वर जुबली मनाती थी। दोहरी भूमिकाओं, रहस्यमय रोल और प्रेम गीतों, कथाओं पर बनी फिल्मों की वे पहचान भी थीं और इनसे उनकी पहचान भी बनी। दर्शकों ने उन्हें बहुत सम्मान दिया, पुरस्कार उनके खाते में जरूर कम रहे, लेकिन न भुलाने योग्य सिनेमा में उनका बढ़ा योगदान है। मायानगरी अर्थात मुम्बई के सांताक्रूज के राम कृष्ण मार्ग के संगीता नामक बंगले के ग्राउंड फ्लोर बी-वन में साधना जी जीवन के पैंतीस से ज्यादा बरस रहीं। उनके पति आरके नैयर का निधन 1995 में हुआ था, इसके बाद बीस साल वे इक्का दुक्का प्रसंग छोड़कर जनता के बीच नहीं आईं। मैं उनका प्रशंसक था, जब भी मुम्बई गया, उनके घर जरूर पहुँचता, शुरू में तो दो तीन बार मिलना ही नहीं हो सका। चूंकि में जिद्दी टाइप का फैन था तो सफलता मिल ही गई। उनके अंतिम संस्कार में भी गया। दिवंगत अभिनेत्री साधना जी के निवास पर सांताक्रूज इलाके में 26 दिसंबर 2015 जैसी भीड़ पहले कभी नहीं देखी गई। साधना जी चूँकि कभी जनता के बीच नहीं आती थीं इसलिए शायद उनके दीदार को तरसते उनके प्रशंसक इस कदर बेताब थे। भाजपा नेत्री शाइना एनसी ,रजा मुराद साहब और लोकल पुलिस किसी तरह उस हुजूम को समझाने और उनके घर के भीतर आने से रोकने में लगे थे। यहाँ से ग्यारह बजे साधना जी की आखिरी यात्रा निकली। अर्थी पर लेटी साधना जी का चेहरा उसी साधना कट हेयर स्टाइल के साथ दिखाई दिया, आँखों पर चश्मा चढ़ा था। एक जिंदगी पूरी हो गई थी। एक अलग दुनिया की यात्रा पर जाने के लिए साधना जी तैयार थीं। देश-विदेश में जिसने हिंदी सिनेमा में लगातार अपनी विशेष स्थिति बनाकर करोड़ों प्रशंसक पैदा किए। लगभग दस फैशन चलाए। सिर्फ साधना कट नहीं। आँखों में तिरछा काजल, शरारा, गरारा, टाइट और बिना बाहों वाला कुरता , चूड़ीदार सलवार, कानों में बड़े बाले, गले में दुपट्टा, किस्म-किस्म के आकर्षक जूड़े और सबसे खास उनकी सौम्य मुस्कान। याद दिलाएं आपको कि एक मुसाफिर एक हसीना और वो कौन थी जैसी फिल्मो की लोकप्रियता का यह आलम था कि उस समय की कॉलेज गल्र्स ने हंसना छोड़ दिया था, बस हल्की मुस्कान चेहरों पर होती थी। भारतीय सिनेमा का अहम दौर रहा साधना जी जैसी अभिनेत्रियों की वजह से। लता जी मानती हैं कि साधना की तरह कई अहिन्दी भाषी अदाकाराओं का हिंदी उच्चारण अद्भुत था। राष्ट्र्रभाषा के लिए उनका प्रेम प्रशंसनीय है। साधना जी के शव वाहन के पीछे गाडिय़ों की लम्बी कतार थी। एक-दो टीवी चैनल्स जो बता रहे थे कि बॉलीवुड की कोई बड़ी हस्ती साधना जी के अंतिम दर्शन के लिए वेटेरन एक्टर संजय खान, संवाद लेखक निर्माता सलीम खान, दीप्ति नवल, वेटेरन एक्ट्रेस शम्मी, चरित्र अभिनेता रजा मुराद, काबिल गायक अभिनेता अन्नू कपूर, प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान, पूर्व मिस इंडिया पूनम सिन्हा, तबस्सुम, साधना जी के नजदीकी श्री सुरेश लालवानी आने- जाने वालों से बात करते हुए सक्रिय थे। इस बीच वेटेरन एक्ट्रेस और साधना जी की सहेली वहीदा रहमान और आशा पारेख जी घर से बाहर निकलती हैं- बेहद गमगीन थीं दोनों। मुझे एक फैन धर्मेन्द्र पाठक भी मिले जो अहमदाबाद से खास तौर पर आए थे, वे शांत और मायूस मेरे पास बैठे थे।