सपाक्स से भाजपा को 90 प्रतिशत नुकसान कांगे्रस को 10 प्रतिशत : कमलनाथ


विशेष प्रतिनिधि
भोपाल, १२ सितंबर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने दावा किया है कि सवर्ण समाज पार्टी के आंदोलन से मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को 90 प्रतिशत नुकसान होगा, जबकि कांग्रेस को मात्र 10 प्रतिशत। कमलनाथ ने कहा- एससी-एसटी एक्ट को लेकर उठे विवाद में कांग्रेस का पक्ष है सब के साथ न्याय करना। कांग्रेस बिल्कुल नहीं चाहती कि एससी-एसटी एक्ट को लेकर मध्यप्रदेश में कोई राजनीति की जाए। उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक व्यवस्था को तोडऩे का अधिकार किसी भी राजनीतिक दल को नहीं है, इसलिए सामाजिक विवादों का हल आपसी भाईचारे के साथ निकालने के पक्ष में हमेशा कांग्रेस रही है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल से आज एक संक्षिप्त मुलाकात में कमलनाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह की सरकार से जनता बहुत त्रस्त है, उन्होंने आज के भारत बंद को ऐतिहासिक सफल बताते हुए कहा कि आम जनता की नाराजगी सरकार को बेदखल करने के लिए उतारू है। एक प्रश्न के जवाब में कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस की जीत उम्मीदवारों पर निर्भर करती है, उनकी कोशिश है कि हर हालत में कांग्रेस उसी उम्मीदवार को मैदान में उतारे, जो जिताऊ हों। जब कमलनाथ से पूछा गया कि आप अकेले ही पूरे प्रदेश का दौरा हेलीकाप्टर से कर रहे हैं, क्या यही कांग्रेस की एकता है तो कमलनाथ थोड़ा-सा हिचके और फिर जोर देकर कहा कि मध्यप्रदेश कांग्रेस में पहली बार एकजुटता उभरकर सामने आई है, जो हमारे लिए जीत का रास्ता निश्चित करेगी। जब कमलनाथ से हाल ही में एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल द्वारा किए गए उक्त सर्वे का जिक्र किया गया, जिसमें सर्वे में बताया गया था कि शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री के रूप में 46 प्रतिशत मध्यप्रदेश की जनता अपनी पहली पसंद बता रही है, वहीं पर आपको मुख्यमंत्री के लिए मात्र 8 प्रतिशत लोग पसंद कर रहे हैं, तब कमलनाथ ने दो-टूक शब्दों में कहा कि सर्वे तो आते-जाते रहते हैं, इस पर ज्यादा यकीन नहीं किया जा सकता। आगे आप देखना चुनाव जैसे ही नजदीक आएंगे, यही सारे सर्वे शिवराज सरकार के खिलाफ दिखाई देने लगेंगे। 2018 विधानसभा चुनाव की जीत को लेकर कमलनाथ आज थोड़े असहज से लगे, फिर संभलकर उन्होंने कहा कि हम ही जीतेंगे।
भाजपा कर रही विभाजन की राजनीति: कमलनाथ: भाजपा विभाजन की राजनीति करती है। इसी राजनीति का दुष्परिणाम है कि अब जातियों में भी बंटवारा होने लगा है। विभाजन की राजनीति के दुष्परिणाम हमारे पूरे भारतीय समाज के लिए खतरे की घंटी है। यह कहना है प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ का। वे आज कांगे्रस कार्यालय में कुर्मी समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने अपने एजेन्डे के अनुरूप अब भोले-भाले आदिवासियों में भी विभाजन शुरू कर दिया है। कभी आपने कल्पना की थी कि आदिवासियों में भी उपजातियों के आधार पर विभाजन के बीज बो दिये जाएंगे? गौंड, कोरकू, भील-भिलाला सभी उपजातियां तो आपस में मिलकर रहती आयी हैं। उन्होंने कहा कि यदि यही हाल रहा तो कल भाषा के आधार पर विभाजन होने लगेगा। हमारे त्योहार भी अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह विभाजन के बीज बोये जाते रहे तो जरा सोचिए इसका अंत कैसा होगा? भारतीय समाज की अखंड एकता समाप्त हो जाएगी।
कमलनाथ ने कहा कि हम सभी भारतीयों को अब सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि हमारा विश्वास सिर्फ एकता में है। एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखने में ही भारतवासियों का हित छुपा है। कांगे्रस ने कभी बांटने की राजनीति नहीं की। यह पंडित जवाहर लाल नेहरू की सोच थी। उनके सामने भारत को एक रखने की सबसे बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती को उन्होंने स्वीकार किया और भारत को एक रखा। इसलिये उन्हें दूरदृष्टा के रूप में पहचान मिली। कमलनाथ ने कहा कि हमने प्रदेश में सर्वे कराया है। यह सर्वे चुनाव में प्रत्याशी चयन का सबसे बड़ा आधार होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव में कई फैक्टर काम करते हैं। केवल सामाजिक प्रतिनिधित्व ही काम नहीं आता। यह देखना जरूरी है कि कौन-सा समाज क्षेत्र में मजबूत है और उसमें भी सबसे मजबूत प्रतिनिधि कौन है। ऐसा मजबूत प्रतिनिधि जिसे बाकी समाज भी स्वीकार करता हो, जिसका व्यापक जनाधार हो और जिसके पीछे संगठन भी हो। अब यह रणनीति आपको तय करना है किस तरह अपने-अपने क्षेत्र में कांगे्रस को जिताना है। इस अवसर पर कुर्मी समाज के प्रतिनिधियों के अलावा कांगे्रस उपाध्यक्ष और संगठन प्रभारी चंद्रप्रभाष शेखर और प्रकाश जैन भी उपस्थित थे।
आज पेटलावद और नीमच में जनसभाएं लेंगे कमलनाथ: प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ 12 सितम्बर को नीमच और पेटलावद दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वे अभी तक 18 जिलों का दौरा कर लगभग 23 सभाओं को संबोधित कर चुके हैं। नाथ पेटलावद (झाबुआ) और नीमच में आयोजित आमसभाओं में जनता को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, महिला असुरक्षा, बेरोजगारी और बंद पड़े उद्योगों पर सरकार को घेरेंगे।