सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर लगाई रोक

शहडोल, 19 सितंबर। शहडोल में 4 साल की मासूम से दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने वाले दोषी की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इससे पहले 26 वर्षीय आरोपी को शहडोल जिला न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनोद की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसी साल 9 अगस्त को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दोषी विनोद की फांसी की सजा बरकरार रखी थी। विनोद ने 13 मई 2017 को 4 साल की बच्ची के साथ रेप किया था और बाद में उसकी हत्या कर थी। विनोद को शहडोल की निचली अदालत ने इसी साल 28 फरवरी को फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ विनोद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जबलपुर हाईकोर्ट ने इसे विरल से विरलतम अपराध करार देते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी थी। चीफ जस्टिस हेमन्त गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने शहडोल जिला निवासी विनोद उर्फ राहुल चौहथा की अपील निरस्त कर दी थी। साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश शहडोल द्वारा दिए गए मृत्युदण्ड के आदेश को उचित ठहराया था। कोर्ट ने मामले को विरल से विरलतम मानते हुए कहा था कि अपराधी के जघन्य कृत्य के लिए मौत के अलावा कोई सजा नहीं हो सकती।
अभियोजन के अनुसार राहुल उर्फ विनोद ने 13 मई, 2017 को सुबह 9 बजे बालिका को टाफी का लालच देकर अगवा किया था। शहडोल बस स्टैण्ड के पीछे मैदान में ले जाकर बच्ची के साथ बलात्कार किया और गला दबाकर हत्या करने के बाद शव झाडिय़ों में छिपा दिया था। कोतवाली थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
मंदसौर के आरोपियों को फांसी की सजा : पिछले महीने मंदसौर में 8 साल की बच्ची के रेप के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों ही आरोपियों को इस मामले में मौत की सजा सुनाई थी, मामला 26 जून का है जब इरफान और आसिफ नाम के दो लोगों ने स्कूल से बच्ची का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया था और उसकी हत्या की कोशिश भी की थी। कोर्ट ने इस मामले में मात्र 56 दिनों में ट्रायल पूरा कर आरोपियों की सजा सुनाई थी।