तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष

राधेश्याम शर्मा
पितृपक्ष शुरू हो चुका है जो 9 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान पितरों को शांत करने के लिए तर्पण-श्राद्ध किया जाता है। यह शांति एवं घर की सम्पन्ता हेतु किया जाता है। ऐसा करने से पितृदोष यानी हमारे पूर्वजों का ठीक से श्राद्ध कर्म ना होने के कारण घर में आने वाली परेशानियों से भी मुक्ति मिलती है। पितृदोष है या नहीं ये किसी इंसान की कुंडली से भी पता किया जाता है। इसका सीधा तरीका है कि अगर कुंडली में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु-केतु में से कोई एक ग्रह बैठा हो तो इसे पितृदोष कहा जाता है। ज्योतिष में सूर्य को पिता कहा गया है, चंद्रमा को माता। अगर इन दोनों ग्रहों में से किसी एक के साथ राहु या केतु हों तो ये ग्रह दूषित हो जाते हैं। इसे ही पितृदोष कहा जाता है। अगर पितृदोष हो तो कई समस्याएं आती हैं। जिस जातक की कुंडली राहु और सूर्य एक साथ बैठे हो तथा चंद्रमा और केतु एक साथ बैठे हो तो यह दोष होता है सूर्य के कारण पितृदोष तथा चंद्रमा के कारण मातृदोष होता है। इसकी शांति बिहार के गया तीर्थ में होती है। यह संपन्न कराने पर पितृ दोष नष्ट हो जाता है वहां भगवान विष्णु पद मंदीर के दर्शन से दर्शनार्थी का कुल तर जाता है गयासुर के वरदान के अनुसार इस तीर्थ का बड़ा महत्व है। फल्गु नदी में किया गया तर्पण उनके पितृ जो स्वर्गवासी हो गये है उन्हें प्राप्त हो जाता है। कन्या राशि के सूर्य में पितृगण पृथ्वी के निकट आ जाते है वैसे भी कन्या राशि का सूर्य पृथ्वी के बहुत निकट होता है। यह मास इसलिए पितृमास कहलाता है। 16 दिनों का यह श्राद्ध पितृ ऋण से मुक्ति दिलाता है।
जिस घर में किसी सदस्य को पितृदोष होता है उस घर में अक्सर कोई ना कोई बीमार रहता है। पितृदोष के कारण घर के बच्चों में हमेशा कलह होता है। जहां पितृदोष होता है वहां संतान पैदा होने में विलंब होता है। बिजनेस में लाभ नहीं होता, उधारी बहुत ज्यादा होती है। इंसान के पैसे उधारी में डूब जाते हैं या बेकार कामों में खर्च हो जाते हैं।
पितृ दोष के लिए उपाय
यदि कुंडली में प्रबल पितृ दोष हो तो पितरों का तर्पण अवश्य करना चाहिए। तर्पण मात्र से ही हमारे पितृ प्रसन्न होते हैं। वे हमारे घरों में आते हैं और हमको आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यदि कुंडली में पितृ दोष हो तो इन सोलह दिनों में तीन बार एक उपाय करिए। सोलह बताशे लीजिए, उन पर दही रखिए और पीपल के वृक्ष पर रख आइये। इससे पितृ दोष में राहत मिलेगी। यह उपाय पितृ पक्ष में तीन बार करना है।