साधन और सुविधाओं से सरल हुए चुनाव

प्रलय श्रीवास्तव
मध्यप्रदेश वर्षों पहले लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव प्रक्रिया को सम्पन्न करवाने के लिए साधन सुविधाएं सीमित और कम संख्या में थे। वाहनों की कमी के साथ संचार व्यवस्था भी उतनी पुख्ता नहीं थी, जितनी वर्ष 1980 के बाद हो सकी। मत-पेटियों में मतदान करवाने के बाद मतगणना में वोटों की गिनती में 3 से 4 दिन लगते थे। मतदाता-सूची को सहेजकर रखना मुश्किल कार्य था। भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी डाक अथवा टेलीफोन के जरिये प्राप्त होती थी। मतदाताओं को मतदान में भाग लेने के लिये प्रेरित करने वाले साधन सीमित थे। लेकिन अब समय बदल चुका है। सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार के साथ आधुनिक नवीनतम टेक्नालॉजी का भी उपयोग होने लगा।
भारत निर्वाचन आयोग की सार्थक पहल का ही परिणाम है कि निर्वाचन प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी के साथ नवीन टेक्नालॉजी को भी त्वरित गति से अपनाया गया। आयोग द्वारा अपनाये गये नवाचारों से अब निर्वाचन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और निष्पक्ष हो गई है। वोटर-लिस्ट में नाम जुड़वाने की ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन सुविधा भी मतदाताओं के लिये सुलभ है। फोटोयुक्त मतदाता-सूची में नाम, विधानसभा क्षेत्र और मतदान-केन्द्र की जानकारी भी सर्च की जा सकती है। मतदाताओं की सुविधा के लिये राष्ट्रीय-स्तर की हेल्पलाइन 1950 टोल-फ्री नम्बर एवं शिकायत निवारण पोर्टल भी उपलब्ध है। मध्यप्रदेश में मतदाताओं की सुविधा के लिये सभी 230 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मुख्यालय और राज्य-स्तर पर मतदाता सहायता केन्द्र, दिव्यांगों के लिये ब्रेल-लिपि में डमी मतपत्र, मतदान केन्द्रों की सुविधाओं में विस्तार, मतदाता-जागरूकता के लिये स्वीप यानि सिस्टेमेटिक वोटर एजुकेशन एण्ड इलेक्ट्रोरल पार्टिसिपेशन की गतिविधियों का संचालन, सीसी, टीव्ही कैमरें, वीडियोग्राफी, टेलीविजन जैसे साधनों का उपयोग, सोशल मीडिया आदि ऐसे अनेक नवाचार अपनाये गये, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया न सिर्फ आसान, बल्कि जन-जन तक पहुंच सकी। नवाचारों में सबसे अहम और महत्वपूर्ण कड़ी ईव्हीएम रही, जिसका उपयोग मध्ययप्रदेश में सबसे पहले वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में हुआ। आयोग ने मतदान प्रक्रिया को और निष्पक्ष बनाने के लिये वर्ष 2017 से चुनावों में वीवीपेट का इस्तेमाल करना शुरू किया है।
इस साल होने वाले विधानसभा और अगले वर्ष के लोकसभा चुनावों में भी वीवीपैट का उपयोग होगा। देशभर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को आपस में जोडऩे के लिये ईआरओ नेट की शुरूआत भी की गई है। इसी साल 2018 में चुनाव आयोग अनेक नवाचारों के साथ सामने आया है। ऐसे सॉफ्टवेयर अपनाये गये हैं, जिनसे निर्वाचन कार्य और चुनाव की तैयारियों को और आसान बना दिया है। वोटर लिस्ट की त्रुटियों में सुधार के लिए भी सॉफ्टवेयर का उपयोग सफल हुआ है। कुल मिलाकर चुनाव प्रक्रिया अब हाईटेक हो चुकी है। आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन की शिकायत सी-विजिल एप के माध्यम से की जा सकेगी। गोपनीय शिकायत के लिए सीजीएस सिटीजन ग्रीवेंस सर्विस एप की शुरूआत की गई है। उम्मीदवारों के नामांकन पर्चे भरने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। इसके लिए जेनासेस एप का इस्तेमाल होगा। विधानसभा चुनाव आई.टी. एप्लीकेशन समाधान, सुविधा और सुगम एप के सहयोग से करवाने की तैयारी है। तीनों के उद्देश्य अलग-अलग है। इस प्रकार विधानसभा चुनाव में 7 एप की भूमिका महत्वपूर्ण साबित होगी। लोकतंत्र के इस उत्सव में नवाचारों ने जब निर्वाचन प्रक्रिया को नई दिशा दे दी है तो आइये हम भी संकल्प करें कि हम मतदान अवश्य करेंगे।
(लेखक पूर्व में निर्वाचन कार्य से जुड़े रहे हैं।)