वोरा, महंत को छोड़कर कांग्रेस का कोई भी बाहरी उम्मीदवार राजनांदगांव से लड़ा तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी

छत्तीसगढ़ का राजनीतिक विश्लेषण
विजय कुमार दास

छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा चुनाव 2018 की राजनीति का परिदृश्य आज चरम सीमा पर पहुंच गया। भारतीय जनता पार्टी ने अपने पोस्टर ब्वॉय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ 77 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। जिसमें उन्होंने एकमात्र मंत्री रमशिला साहू और विधायकों की टिकट काटकर यह संदेश दे दिया कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का 65 प्लस का मिशन पूरा करके ही दिखाएंगे। राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र से जैसे ही डॉ. रमन सिंह के उम्मीदवारों की घोषणा जैसे ही राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र में पहुंची तो राजनांदगांव की राजनीति में बिजली की तरह एक बार फिर करंट आ गया दूसरी ओर राजनांदगांव के कांग्रेस के नेताओं द्वारा डॉ. रमन सिंह के मुकाबले में किसी बाहरी उम्मीदवारों को उतारना कांग्रेस के पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव पी.एल. पुनिया और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने एक रणनीति के तहत यह बयान दिलवाया है कि रमन सिंह के मुकाबले में चूंकि राजनांदगांव में दमदार उम्मीदवार नहीं है, इसलिए किसी कद वाले बाहरी उम्मीदवार को टिकट दिया जाए ऐसा कहकर राजनीति में मुश्किल खड़ा कर दिया गया है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के टीम ने आज राजनांदगांव के 22 वार्डों का दौरा करके यह पता लगाने की कोशिश की डॉ. रमन सिंह के मुकाबले में बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता है। 80 प्रतिशत लोगों ने यह कहा कि डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के एक लोकप्रिय एवं ईमानदार मुख्यमंत्री के रुप में ख्याति प्राप्त व्यवहार कुशल नेता है। उनको न तो बाहरी आदमी हरा सकता है और न ही स्थानीय उम्मीदवार हरा पाएगा। परंतु यदि बाहर के उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया तो संभवत: उसकी जमानत जब्त हो जाएगी। लोगों ने यह कहा कि कांग्रेस के पास यहां पर उम्मीदवार अच्छे हैं, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता डॉ. रमन सिंह के लोकप्रियता से इतने घबराए हुए हैं कि उन्हें लगता है कि कोई बड़ा नेता ही नैयापार लगाएगा। लेकिन ऐसी स्थिति राजनांदगांव में नहीं है। कांग्रेस के एक पार्षद ने यहां तक तो कहा कि कांग्रेस के बड़े हमें क्या समझाएंगे। नाम न छापने की शर्त पर यह कहा कि भाजपा की सरकार है और कांग्रेस के 18 पार्षद यहां नगर निगम के ठेकेदार हैं, जो किसी किसी नाम से ठेकेदारी करते हैं। इनके सामने डॉ. रमन सिंह को हराने के लिए नैतिक बल कहा है और दूसरी ओर भूपेश बघेल और पी.एल. पुनिया धृतराष्ट्र की तरह आंखों में पट्टी बांधकर राजनांदगांव में डॉ. रमन सिंह के सामने बाहरी नेता को पैराशूट से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। जिसके बारे में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पहले ही कह दिया है कि पैराशूट से कोई नहीं उतरेगा। स्थानीय जो मजबूत उम्मीदवार होगा उसे लड़ाया जाएगा। भूपेश बघेल की खुद की और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट जिसमें भी वन, टू, थ्री उम्मीदवार है उनको हटा कर बताया जा रहा है कि करुणा शुक्ला राजनांदगांव से डॉ. रमन सिंह को चुनौती देने आएंगी। राष्ट्रीय हिन्दी मेल टीम ने 22 वार्डों के पास 18 ग्रामीण इलाकों में जा कर पूछा सबने एक स्वर में कहा आ जाएं करुणा शुक्ला और जमानत जब्त करा लें। तब राहुल गांधी को पता चलेगा कि उनकी पैराशूट वाली बात किसने गायब कर दी। कुल मिलाकर खबर का लब्बेलुआब यह है कि मोतीलाल वोरा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रशासनिक महासचिव है। उन्होंने राजनांदगांव की धरती से राजनीति शुरु की है। यदि वे आते हैं तो उनका स्वागत होगा और समर्थन भी मिलेगा और वे नहीं आते हैं तो कांग्रेस चाहे तो चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष चरणदास महंत को दो जगह से चुनाव लड़वा दें। राजनांदगांव और सक्ती से भी। कम से कम कांग्रेस की जमानत तो जब्त नहीं होगी। उधर दूसरी ओर डॉ. रमन सिह के समर्थकोंकाराजनांदगांव में अद्भुत उत्साह है। उन्होंने तो कसम खा ली है कि राजनांदगांव से राहुल गांधी भी आ जाएंगे तो रमन सिंह को चुनाव नहीं हरा सकेंगे और तो और कांग्रेस की नई रणनीति, नई चालें डगमगाई हुई चाहे जितनी भी दिखे जनता बदलाव चाहती है लेकिन डॉ. रमन सिंह से जनता नाराज नहीं है, इस बात को कांग्रेस के हर बड़े नेता को समझना होगा।