शिवराज-सिंधिया दोनों परेशान

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग न्यूज चैनल्स द्वारा कराए जा रहे सर्वे ने भाजपा के पोस्टर ब्वाय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को चिंता में डाल दिया है। 15 दिन पहले तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारी यह मानकर चल रहे थे कि मध्यप्रदेश में भाजपा 130 सीटें जीत कंर सरकार बना रही है। भाजपा संगठन द्वारा कांग्रेस के प्रभाव वाली बाकी सीटों के लिए रणनीति बनाकर काम किया जा रहा था। लेकिन विगत दिवस एबीपी न्यूज के सी-वोटर सर्वे ने अचानक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चिंता बढ़ा दी है। वहीं बात करें ज्योतिरादित्य सिंधिया की तो वे इसलिए परेशान हैं कि उन्हें भी 15 दिन पहले तक यह लग रहा था कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस का ग्राफ तो बढ़ा है, लेकिन मध्यप्रदेश में सरकार बनाने जैसी स्थिति कांग्रेस की नहीं थी। सिंधिया और कांग्रेस पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे में भी यह बात सामने आई थी, कांग्रेस के सर्वे के मुताबिक मध्यप्रदेश में कांग्रेस को अधिकतम 90 सीट ही मिल रही थी। सी-वोटर सर्वे में यह बताया गया कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस को 120 और भाजपा की 90 सीटें आ रही हैं। बीस सीटें अप्रत्याशित बताई थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह पता है कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ अपने घर बैठे हैं, वे प्रचार करने के लिए नहीं निकल रहे हैं, बाकी कांग्रेस के सभी नेता अपने-अपने क्षेत्र में सीमित हो गए हैं। मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जरूर नरेंद्र मोदी एवं शिवराज को ललकारकर चुनावी सभा कर रहे हैं। राहुल गांधी यह घोषणा बार-बार कर रहे हैं कि मध्यप्रदेश में यदि कांग्रेस की सरकार बनी तो वे दस दिन में किसानों का कर्ज माफ कर देंगे और इस मुद्दे पर सरकार बनाने में सफल हो जाएंगे। राहुल गांधी यदि मध्यप्रदेश में किसानों का कर्ज माफ भी करते हैं तो इसका फायदा मात्र प्रदेश के 10 प्रतिशत किसानों को ही होगा। क्योंकि 90 फीसदी किसान ऐसे हैं, जो समय पर अपने कर्ज का भुगतान करते हैं। कर्ज माफी की घोषणा के बाद सरकार द्वारा एक निश्चित राशि में क र्ज माफी की बात कही जाती है। जिससे बड़े डिफाल्टर किसान भी नाराज हो जाएंगे। कर्ज माफी का फायदा प्रदेश के सभी किसानों को हो, यह संभव नहीं है। 2014 के आम चुनाव में केंद्र में जब यूपीए की सरकार थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने किसानों का 68 हजार करोड़ रूपए का कर्ज माफ किया था, इसके बाद भी यूपीए को 540 में मात्र 46 सीटें ही मिली थीं। इसलिए यदि राहुल गांधी किसानों का कर्ज माफ करके सरकार बनाने का सपना देख रहे हैं तो उन्हें भी इससे बाहर निकलकर सोचने की जरूरत है। इसके विपरीत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के 80 फीसदी किसानों को मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के तहत लाभ दिया है और साढ़े पांच हजार करोड़ रूपए का भुगतान भी किया है। जो कि किसानों को फसल के बोनस के रूप में मिला है। मध्यप्रदेश के 56 हजार गांव की लगभग 90 फीसदी आबादी को शासन की अलग-अलग 80 प्रकार की योजनाओं के तहत कुछ न कुछ तो लाभ मिला है। चाहे वो मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना या मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ही क्यों न हो। लेकिन पार्टी के विधायक और पटवारी, तहसीलदार हितग्राहियों को चिन्हित नहीं कर पाए और न ही हितग्राहियों को शासन की योजनाओं की जानकारी दे पाए हैं इसलिए लोग गुस्से में जरूर हैं परंतु शिवराज से नाराज नहीं हैं। कृषि के क्षेत्र में जो अभूतपूर्व काम हुए हैं, इसका श्रेय कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरा और नर्मदा घाटी विकास के लिए काम करने वाले आईएएस अधिकारी मुख्य सचिव के समकक्ष रजनीश वैश्य को जाता है। राजेश राजौरा द्वारा बनाई गई नीतियों की वजह से प्रदेश के किसानों के चेहरे पर खुशी देखने को मिलती है। इनके अलावा रजनीश वैश्य की बदौलत प्रदेश में डूब में आने वाले लोगों को मालवांचल में राहत मिली है और जिन क्षेत्रों में डेम का निर्माण किया गया है, वहां कोई भी किसान ऐसा नहीं है, जिसे मुआवजा नहीं मिला हो। यही कारण है कि शिवराज सरकार के खिलाफ किसी प्रकार का आंदोलन खड़ा नहीं हो पाया। इनके अलावा प्रदेश सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मध्यप्रदेश सरकार के युवा आईएएस अधिकारी व जनसंपर्क विभाग के आयुक्त पी. नरहरि ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रचार-प्रसार की वजह से प्रदेश की जनता को सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी मिली है। इसके बाद भी यदि सी-वोटर के सर्वे में यह बात सामने आती है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की विदाई हो रही है तो कहीं न कहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए यह चिंता का विषय है। उन्हें भी इस बारे में सोचना चाहिए। ऐसे में सिंधिया और शिवराज सिंह दोनों यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि मध्यप्रदेश में आखिर सरकार किसकी बन रही है।
जीतू पटवारी के बयान से बढ़ी सरगर्मी
कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे जनसंपर्क अभियान के दौरान मतदाताओं से कह रहे हैं कि आप तो मुझे देखकर वोट दीजिए, पार्टी जाए तेल लेने। चुनावी मौसम में जीतू पटवारी के इस बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।