28 तारीख को तय होगा करणी सेना का रुख

राष्ट्रीय हिन्दी मेल नेटवर्क
विदिशा, २५ अक्टूबर। राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी बुधवार को विदिशा आए। सबसे पहले वे गजार मूडऱा में राजेन्द्र राजपूत के घर पहुंचे और दुखी परिवार को सांत्वना दी। शाम को प्रेसवार्ता के जरिए पीडि़त परिवार की मदद की बात कही। साथ ही 28 तारीख को किस राजनैतिक दल का उन्हें समर्थन करना है के बारे में अपने रूख का ऐलान करेंगे।
आगामी 28 अक्टूबर को इंदौर में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में शामिल विभिन्न संगठनों, समाज के संगठनों के साथ एक बैठक करेगी। इसके बाद यह तय करेंगे कि वे किस पार्टी को अपना समर्थन देंगे। एफेडेविड के अनुसार उनका सहयोग न करने वाली भाजपा और कांगे्रस को दरकिनार कर थर्ड फ्रंट के रूप में चुनाव में कूदेंगे।
यह बात राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने कही। राजपूत धर्मशाला में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान सुखदेवसिंह ने कहा कि हमने एक एफेडेविड तैयार किया है। जिसमें एट्रोसिटी एक्ट में बिना जांच के तुरंत गिरफ्तारी के मुद्दे को वापिस लिए जाने सहित अन्य बिंदुओं पर मांग की गई है। जो भी राजनैतिक दल चाहे वह भाजपा हो या कांगे्रस हमारे इस एफेडेविड को भरकर देती है और उसे पूरा करने का वादा करती है तब हम उस पार्टी का चुनाव में समर्थन करेंगे।
दोनों ही पार्टी के नेताओं से संपर्क किया गया है। बात न बनने पर तीसरे फ्रंट के रूप में कई छोटे दल और सपाक्स जैसे अन्य सहयोगी संगठन जो इस काले कानून का विरोध करते आ रहे हंै के साथ मिलकर थर्ड फ्रंट बनाकर खुद चुनाव लडेंगे। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों पर करणी सेना का प्रभाव है। गजार मूडऱा के राजेन्द्र राजपूत ने एक आरक्षित वर्ग के व्यक्ति सुंदरलाल अहिरवार द्वारा एक्ट की धमकी देकर डराने के बाद आत्मघाती कदम उठाने के मामले में कड़ा रूख अपनाते हुए राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह ने बताया कि हम बुधवार को उनके घर गए थे। उनका परिवार विलख-विलख कर रो रहा है।
पुलिस ने आज तक इस मामले में कोई एफआईआर नहीं की है। हम मांग करते है कि पीडि़त परिवार को एक करोड़ रूपए मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और इस पूरी घटना के जिम्मेदार सुंदरलाल अहिरवार के खिलाफ कार्यवाही की जाए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में इस काले कानून से कई लोग प्रताडि़त होकर जेल में हंै।