साहब इतना बता दो, क्षेत्र में जाएं या नहीं

इन दिनों भाजपा में दावेदारों की भीड़ लग रही है। ऐसा नहीं कि पार्टी उन्हें बुला रही है, बल्कि जब से हवा फिजां में फैली है कि पार्टी 78 विधायकों की टिकट को काट रही है, बेचैनी सभी की बढ़ी है। कई वर्षों से पार्टी में कद्दावर नेता की भूमिका निभा चुके पूर्व मंत्री इससे अछूते नहीं हैं। एक जमाने में टिकटों के लिए ये दूसरों की पैरवी करते थे लेकिन नए दौर की पार्टी में आलम यह है कि इन्हें भी अपनी सीट बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। नेताजी पार्टी कार्यालय की रोज हाजिरी लगा रहे हैं, लेकिन कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहा है। लिहाजा आज तो ये बिफर ही पड़े, पार्टी के एक बड़े पदाधिकारी से लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोलने लगे भाईसाहब आप सिर्फ इतना बता दो कि क्षेत्र में जाएं या नहीं, क्योंकि कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि सीट फाइनल है या नहीं। अब बेचारे पदाधिकारी भी बड़े असमंजस में थे, क्योंकि ना बोलने की हिम्मत नहीं और हां बोलकर घंटी अपने गले में, बंधवाने जैसी बात थी, लिहाजा बिना उत्तर दिए ही आगे बढ़ गए। नेताजी भी संशय में कि इसका अर्थ क्या लगाएं, सो अभी भोपाल में ही हैं। …खबरची