नेहरिया कोयला खदान की छत ढही, 4 की मौत

परासिया,26 अक्टूबर। वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड पेंच क्षेत्र की नेहरिया भूमिगत कोयला खदान में छत ढहने से चार कामगारों की मौत हो गयी। एक कामगार को बचा लिया गया। हादसा खदान में प्रथम पाली में सुबह नौ से दस बजे के बीच हुआ। इस दौरान खदान में बचे हुए कोयले को हटाने का काम एसडीएल मशीन के माध्यम से किया जा रहा था। खदान से शव पौने पांच बजे बाहर लाये जा सके । शव को कामगारों ने खदान के मुहाने पर राकेह दिया। शव को बाहर ले जाने से उन्होने रोक दिया। मृतक के साथी भी बिलख उठे। उन्होंने प्रबंधन से सुरक्षा में चूक का सवाल उठाया। प्रबंधन का उन्होंने विरोध किया। इस बीच मृतंकों की माताएं भी खदान परिसर में पहुंच गई। यहां उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया। दरवाजा तोडऩे वे आमादा हो गयी। भारी सुरक्षा के बीच शवों को पोस्ट मार्टम के लिए भेजा गया।
घटना की सूचना के आधे घंटे बाद रेस्क्यू टीम खदान में पहुंची और राहत और बचाव कार्य प्रारंभ किया। हादसा खदान के 38 लेवल एसडब्ल्यू सिक्स सेक्शन में हुआ। घटना के समय यहां दस लोग काम कर रहे थे। एसडीएल मशीन कोयला हटा रही थी। खदान में छोटी मशीनों से कोयला हटाया जाता है। मशीन इस बीच ब्रेक डाउन हो गयी। मशीन के नीचे लकडिय़ों के टुकड़े डालकर उसे पीछे करने का प्रयास कामगार कर रहे थे। खदान के इस हिस्से में डिपिलरिंग का काम किया जा रहा था। खदान में इस इलाके में बोर्ड एंड पिलर तकनीक से काम होता है जिसमे कोयला निकालते समय सपोर्ट के लिए कोयले के पिलर छोड़े जाते है। बाद में इन पिलरों को लौटते समय निकाल लिया जाता है। यही कोयला निकाला जा रहा था।
दिलीप एसडीएल ऑपरेटर मशीन को पीछे कर रहा था। रामप्रकाश, राजेश, रफीक और रविशंकर समीप खड़े थे । इसी दौरान अचानक चट्टान छत से ढह गई। दिलीप और अन्य चार लोग चट्टान में दब गए। चट्टान 5 मीटर मोटी बताई जा रही है। रेस्क्यू टीम को चट्टान हटाने में मशक्कत के सामना करना पड़ा। दोपहर बाद पांच बजे पहला शव बाहर लाया जा सका। इससे पहले घायल दिलीप को निकालकर भोकई डिस्पेंसरी भेजा गया। खदान में वेकोलि सुरक्षा समिति के सदस्य नारायण राव सराठकर भी पंहुंचे। परासिया तहसीलदार किरण बरबड़े भी लगभग साढ़े तीन बजे खदान पहुंच गई थी। कलेक्टर वेदप्रकाश शर्मा और एसपी अतुल सिंग शव बाहर निकाले जाने के बाद खदान पंहुंचे। शव रखकर प्रदर्शन करने वालों से उन्होंने चर्चा की।
पीडि़त के परिजनों से मिले बावरिया
पूर्व विधायक ताराचंद बावरिया दोपहर डेढ़ बजे के आसपास नेहरिया कोयला खदान पंहुंचे। खदान में अधिकारियों से उन्होंने रेस्क्यू वर्क पर चर्चा की। बीएमएस के महामंत्री कुंवर सिंह, तेज प्रताप शाही से उन्होंने खदान के अंदर की परिस्थितियों और फंसे लोगों पर चर्चा की। घटना स्थल पर मौजूद पीडि़तों के परिजनों से भी वे माइक और उन्हें ढांढस बंधाया।
ढाई महीने पहले पिता बना था रविशंकर
हादसे में चट्टान के नीचे दबे जनरल मजदूर रविशंकर के परिजनों के लिए सबसे दुखद हादसा है। जमुनिया पठार खदान के लिए जमीन देने के बाद रविशंकर को खदान में नौकरी मिली थी। ढाई महीने पहले ही वह एक शिशु का पिता बना था। हादसा इस परिवार के लिए दुखद संदेश लेकर आया।
पौने तीन बजे पंहुंचे जीएम
पेंच कोयला क्षेत्र के जीएम सोहाग पंड्या दोपहर बाद पौने तीन बजे खदान में उतरे। उनके साथ न्यूटन सब एरिया मैनेजर हंसराज बावरिया, शिवपुरी सब एरिया मैनेजर सिन्हा, ओवर मैन संजय सिंह खदान में पंहुंचे।
खदान के आसपास लगी भीड़
हादसे की सूचना के बाद खदान के चारो और बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। मजदूर नेता, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, और ग्रामीणों का यहां हुजूम लग गया। सीआईएसएफ के जवान बड़ी संख्या में तैनात कर दिए गये। शिवपुरी थाना प्रभारी राजेन्द्र मर्सकोले, अमरवाड़ा थाने से सुमेर सिंग जगत स्टाफ के साथ मोर्चा संभाले रहे।
हादसे के चारों पीडि़त एक ही राशि के
आज का दिन नेहरिया कोयला खदान में तुला राशि वालों के लिए भारी रहा। इस दुर्घटना के चारो पीडि़त राजेश, रविशंकर, रामप्रकाश और रफीकसभी के नाम र से शुरू होते है। खदान के सेक्शन प्रभारी ओवर मैंन रंजीत वर्मा का नाम भी इसी राशि से शुरू होता है। एक अन्य कामगार दिलीप का नाम भी इसी अक्षर से प्रारंभ होता है। जो दस लोग घटना स्थल पर थे उनमें से छह का नाम इसी अक्षर से शुरू होता है।
एक का सौभाग्य, दूसरे के लिए बना दुर्भाग्य
खदान में एसडीएल ऑपरेटर का काम रफीक देखते है। इस गैंग में जब मशीन फंसी तो रफीक को उसे पीछे लेते नहीं बना। तब दिलीप ने मशीन को संभाला। बाकी लोग और रफीक पीछे खड़े हो गए। इसी दौरान छत ढह गई। रफीक चट्टान में दब गया। जबकि दिलीप मशीन में फंस गया। एसडीएल मशीन में छत पर लोहे का एक फ्रेम होता है जिसे केनोपी कहते है। इस केनोपी से चट्टान टिक गई और दिलीप बच गया।
6 सालों में दूसरा बड़ा हादसा
नेहरिया खदान में बीते छह सालों में दूसरा बड़ा हादसा हुआ। इससे पहले मार्च 2012 में खदान में हादसा हुआ था। तब भी छत गिरने से दो लोगों की जान गई थी। उंस दौरान भी खदान में मैनेजर खोब्रागड़े ही थे।
एचएमएस बोली यहीं मृत घोषित करो
मजदूर संगठन एचएमएस के अध्यक्ष राजेश सुर्यवंशी खदान पंहुंचे। उनके साथ एचएमएस के साथियों ने शवों को अस्पताल ले जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि खदान परिसर में ही पंचनामा बनाकर शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेजा जाए। उनका कहना था कि अस्पताल ले जाकर मृत घोषित करने से खदान के अंदर मौत से मिलने वाला कम्पनशेसन नहीं मिल पाता। हमेशा से वेकोलि के अधिकारी यही षड्यंत्र करते है।
विधायक बाल्मीक पंहुंचे
विधायक सोहन लाल बाल्मीक साढ़े तीन बजे के आसपास खदान के मुहाने पर पंहुंचे। उन्होंने खदान कामगारों से बात की । अधिकारियों से भी दुर्घटना को लेकर चर्चा की। बीएमएस कार्यकारीअध्यक्ष संजय सिंह, निर्मल राहा, रामकेरा यादव भी मौके पर पंहुंचे।