बाबाओं के आने से दूर होतीं बाधाएं

 

इन दिनों चुनाव की खुमारी में सभी बह चले हैं। नेता बन जाने का ऐसा जुनून कि संत-महंत, बाबा-बैरागी सभी बैराग्य का चोला उतारकर मायावी दुनिया में गोते लगाने की होड़ में हैं। पिछले दिनों सत्ताधारी दल ने पांच बाबाओं को सीधे मंत्री क्या बना दिया? सभी बाबा अपने-अपने मठ छोड़कर पार्टी के दफ्तर की तरफ दौड़ लगा रहे हैं। हालांकि ये अलग है कि इन पांच बाबाओं का राजनेता का चोला ज्यादा देर नहीं चढ़ा रहा और एक मठाधीश तो खुद को बाबा बनाए जाने से कुपित भी चल रहे हैं। खैर आज भी इसी सत्ताधारी दल के दफ्तर में कोई पांच-छह टोलियों में बाबा पहुंचे। इसमें से कुछ ने तो बाकायदा अपनी अर्जियां भी दीं और कुछ महंतों ने परिसर में ही धूनी रमा कर बैठ गए, मंत्रोच्चार भी किया। पार्टी के बड़े नेता इससे काफी खुश हैं। एक बड़े नेता का कहना था कि चुनाव तक ऐसे ही संत-महंत ऑफिस आते रहें और धूनी रमाते रहें, जिससे कार्यालय में यदि कोई बाधा हो तो दूर हो जाए। अब नेता जी को कौन समझाए सबसे बड़ी बाधा तो बाहर घूम रही है, जिसे आपने मंत्री बनाया और अब वो रोज निम्बू काट रहे हैं। …खबरची