मोदी ने कहा मिल गया आशीर्वाद, उम्मीदवारों पर ध्यान दो शिवराज

चुनाव तक चलने वाली जनआशीर्वाद यात्रा अचानक स्थगित, केंद्र से आए फरमान की सूचना धर्मेंद्र प्रधान ने दी

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को अचानक अपनी जन आशीर्वाद यात्रा को स्थगित कर दिया है। पार्टी सूत्रों की माने तो केंद्र के निर्देश पर प्रदेश भाजपा संगठन ने यात्रा को स्थगित किया है। बताया जाता है कि इसकी जानकारी केंद्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूत बनकर आए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एवं प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने यात्रा संयोजक को दी, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा चुनाव होने तक जारी रहेगी। लेकिन गुरूवार को अचानक ऐसा क्या हुआ कि मुख्यमंत्री को जबलपुर में यात्रा को विराम देने की घोषणा करनी पड़ी। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिवराज सिंह चौहान से जनआशीर्वाद यात्रा रोकने को कहा था। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का वक्त करीब है, लेकिन यात्रा में व्यस्त होने की वजह से अच्छे प्रत्याशियों का चयन नहीं हो पा रहा है। प्रदेश भर से टिकट के दावेदारी प्रदेश भाजपा कार्यालय में जमें हुए हैं। इसलिए यात्रा को बंद करके टिकट के बंटवारे पर ध्यान दें। ज्ञात रहे कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा 14 जुलाई को बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री ने 103 दिन बाद जबलपुर में यात्रा को स्थगित करने की घोषणा कर दी। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 185 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया और हजारों रथ सभा व आम सभाओं को संबोधित किया। यात्रा में उन्हें पार्टी के कुछ मौजूदा विधायकों के खिलाफ भयंकर नाराजगी एवं सरकार के एंटी इनकंबेंसी भी देखने को मिली।
जनता ने सीधे मुख्यमंत्री से विधायकों की शिकायतें की हैं। करीब 60 विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय विधायाकों के आक्रोश को लेकर कार्यकर्ताओं और जनता ने शिवराज सिंह चौहान से अपनी व्यथा भी बताई और यह भी बताया कि शासन की योजनाएं जनोन्मुखी और आम जनता के लिए राहत देने वाली हंै, लेकिन नाकारा और कमीशनबाजी के चक्कर में पड़े विधायकों की वजह से योजनाएं धरती पर अमल में नहीं आ पातीं। लिहाजा इस जन आशीर्वाद यात्रा में जनता का आशीर्वाद शिवराज सिंह चौहान के प्रति दिखा लेकिन जन प्रतिनिधियों के अकर्मण्यता की वजह से पार्टी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी जैसा माहौल दिखाई देने लगा था। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ग्राफ तो बढ़ता हुआ दिखाई दिया, लेकिन राष्ट्रीय न्यूज चैनल्स के सर्वे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी चिंता में डाल दिया। सर्वे में बताया गया कि राजस्थान और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार जा रही है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह राजस्थान के संभावित परिणाम को लेकर उतने असहज नहीं दिखे। क्योंकि राजस्थान में मतदाता हर पांच वर्ष में सत्ता परिवर्तन के लिए मताधिकार का प्रयोग करता है। लेकिन मध्यप्रदेश के संदर्भ में वे चाहते हैं कि किसी भी कीमत पर यहां भाजपा के हाथों से सत्ता नहीं जाना चाहिए। क्यों कि मध्यप्रदेश संघ और भारतीय जनता पार्टी का गढ़ बन चुका है। गुजरात के बाद यदि हिन्दुत्व के प्रयोगशाला के रूप में नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ध्यान का ध्यान है तो वह यही मध्यप्रदेश है, जहां कुशाभाऊ ठाकरे और राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने अपने अरमानों से सिंचित कर आज की अपराजेय भारतीय जनता पार्टी को जन्म दिया था। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान को जन आशीर्वाद यात्रा रोककर चुनाव के लिए उम्मीदवारों के बेहतर चयन पर ध्यान देने को कहा है। दोनों राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक मध्यप्रदेश में भाजपा को 90 व कांग्रेस को 130 सीटें मिल रही है। बाकी सीटें अन्य दलों के खाते में जाते हुए बताया है। कुछ न्यूज चैनल्स के सर्वे में भाजपा को 127, कांग्रेस 92 व अन्य दलों के खाते में 11 सीटें बताई थी। कुछ सर्वे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उत्साह से भर दिया तो कुछ सर्वे ने उन्हें चिंता में डाल दिया। मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार को शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल को मिलाकर 15 साल हो गए हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी अपने भाषण में इस बात को कह चुके हैं कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अंगद के पांव की तरह है, यहां पार्टी संगठन की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसके बाद भी न्यूज चैनल के सर्वे भाजपा के खिलाफ आ रहे हैं। हार के डर के बीच मुख्यमंत्री ने मतदाताओं को रिझाने के लिए संबल योजना शुरू की। इस योजना के दौरान उन्होंने प्रदेश में सवा दो करोड़ लोगों का पंजीयन भी कर दिया। उन्होंने मजदूर परिवार और 5 एकड़ के किसान को संबल योजना के तहत लाभ दिया है। जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिर्फ लोकप्रियता ही हासिल नहीं की, बल्कि अपनी पार्टी के मौजूदा विधायकों की स्थिति को भी करीब से समझा। यात्रा के दौरान एट्रोसिटी एक्ट के विरोध में प्रदर्शन हुए, लोगों ने स्थानीय विधायकों की कारगुजारियों की वजह से मुख्यमंत्री को काले झंडे भी दिखाए। यात्रा के दौरान जो भीड़ एकत्रित हो रही थी, उसे देखकर भाजपा के प्रदेश नेतृत्व को यह लगने लगा था कि मध्यप्रदेश में चौथी बार फिर भाजपा की सरकार बन रही है। लेकिन चुनाव का वक्त करीब आते ही ग्रामीण क्षेत्रों से जो विरोध की खबरें सामने आने लगीं उसने भाजपा संगठन को एक बार फिर चिंता में डुबो दिया और इसका कारण बार-बार सर्वे में कांग्रेस का बढ़ता ग्राफ बताया जाना है। ऊपर से राष्ट्रीय न्यूज चैनल भी इस बात का दावा कर रहे हैं कि इस बार मध्यप्रदेश में भाजपा के हाथ से सत्ता खिसक सकती है। इसी को देखते हुए संभवत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा को बीच में ही रूकवा दिया। आगे इस यात्रा को 45 विधानसभा सीटों में और गुजरना था।