नेहरिया खदान में प्रबंधन ने की सुरक्षा में चूक

परासिया, 26 अक्टूबर। चार कोयला कामगारों के खदान दुर्घटना में निधन के बाद आज मजदूर संगठन आक्रामक तेवरों में थे। बीएमएस और एचएमएस के बडे पदाधिकारी खदान में पहुंंचे। बीएमएस की उच्च स्तरीय टीम ने खदान का निरीक्षण किया। खदान में हादसे के स्थल का निरीक्षण करने के बाद बीएमएस आज आक्रामक तेवरों में था।
बीएमएस ने दुर्घटना स्थल पर सुरक्षा में चूक के आरोप जडे। साथ ही पूरी खदान में सुरक्षा की खामियां भी गिनाई। वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड के पेंच क्षेत्र की नेहरिया कोयला खदान में छत ढहने से चार मजदूरों की मौत के बाद आज का दिन गहमागहमी भरा रहा। वेकोलि के सीएमडी और कोल इंडिया के डीपी भी खदान में पहुंचे। अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के अध्यक्ष और सीआईएल सेैफ्टी बोर्ड मैनेजर बीके राय, वेकोलि सेफ्टी बोर्ड मैनेजर प्रमोद सिंह, नारायण राव सराठकर, सुधीर घोरडे जी समन्वयक, एरिया सेफ्टी कमेटी मेंबर प्रमोद जैन, कन्हैया सिंह, इलाही बख्श, राजेष मालवी, महामंत्री कुंवर सिंह, तेजप्रताप शाही, अन्य बीएमएस के पदाधिकारी खदान पहुंचे। खदान में उन्होंने दुर्घटनास्थल का जायजा लिया।
डिपिलरिंग सैक्षन में नहीं किया सपोर्ट
बीएमएस की टीम ने निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट बनाई। बीएमएस के महामंत्री कुंवर सिंह ने बताया कि खदान में सपोर्ट खराब था। दुर्घटना स्थल डिपिरिंग सैक्षन है इसके बाद भी यहां सपोर्ट नहीं था। खदान में सुरक्षा में पूरी लापरवाही नजर आई। खदान में आने जाने के रास्ते ट्रेवलिंग रूट में एक भी लाईट नहीं है। एक हजार से ज्यादा मैन पावर वाली खदान में आने जाने के रास्ते में लाईट नहीं होना एक बडी चूक है। बीएमएस ने अपनी टीप में बताया कि खदान में सुरक्षा मटेरियल भी पर्याप्त नहीं है।
नहीं किए लांग रूफ बोल्ट सपोर्ट
खदान में डिपिलरिंग एरिया में जो सिस्टेमेटिक सपोर्ट रूल बनाया गया है उसके तहत खदान के इस हिस्से में लांग रूफ बोल्टिंग सपोर्ट किया जाना था जो नहीं किया गया था। लेज का सपोर्ट नहीं किया गया। तीन मीटर उंची छत को ज्यादा उंचा करने के लिए लेज का सपोर्ट किया जाता है। जो यहां नहीं किया गया। गोपेज का सपोर्ट नहीं था। क्रार्नर क्रास नहीं बांधे गए थे। ब्रेकर लाईन नहीं लगाई थी। इसका नतीजा चार मौतों वाली दुर्घटना के रूप में सामने आया। बीते दस सालों में पहली बार किसी खदान में इतनी मौते एक साथ हुई। बीएमएस इन बिंदुओं पर प्रबंधन को बख्शने के मू में नहीं है। बीएमएस के नेताओं ने दौरे के बाद साफ कहा कि चूक श्रमिकों की जान जाने का कारण बनी। इसको बर्दाष्त नहीं किया जाएगा।
कमजोर है पेंच क्षेत्र की खदानों की छत
कोयला खदानों में छत की मजबूती आंकने के लिए आरएमआर सिस्टम होता है। इसे राक मास रेटिग के नाम से जाना जाता है। इसके पांच वर्ग बनाए गए है। शून्य से बीस बहुत खराब, बीस से चालीस खराब, 41 से 60 ठीक, 61 से 80 अच्छा, 81 से 100 आरएमआर को बहुत अच्छा माना जाता है। पेंच कोयला क्षेत्र में बीते एक दषक में प्राणघातक दुर्घटनाएं छत ढहने से ही हुई है। पेंच का आरएमआर खराब है। तीस से बत्तीस आरएमआर इस क्षेत्र का है। आरएमआर चट्टान की क्वालिटी, चट्टान के मटेरियल, ग्राउंड वाटर, सहित छह बिंदुओं के आधार पर तय किया जाता है। पेंच कन्हान से लगे पाथरखेडा आरएमआर साठ से ज्यादा है।
बीते दशक में पेंच क्षेत्र की खान दुर्घनाएं
30 मई 2009, रावनवाडा खास कोयला खदान में रूफ फाल से एक कामगार की मौत, एक घायल,
11 नवंबर 2009 माथनी खदान में रूफ फाल से एक कामगार की मौत।
4 मार्च 2013 नेहरिया खदान में रूफ फाल से माईनिंग सरदार सरमानंद शर्मा और ब्लास्टिंग मजदूर अषोक कुमार की मौत।
5 मार्च 2015 प्रिज्म कोयला खदान में रूफ फाल से जगदीश पवार की मौत।
25 अक्टूबर 2018 नेहरिया खदान में रूफ फाल से रफीक, रामप्रकाश, राजेश, रविशंकर की मौत।