कलेक्टर न बदलो साहब, नेता बदल दो

 

मध्यप्रदेश में आदर्श आचार संहिता लग गयी है। वैसे अफसरी करने का ये सबसे स्वर्णिम काल माना जाता है। न किसी की सिफारिश चलती है न किसी का रौब। एक कांस्टेबल भी अपने इलाके का कोतवाल हो जाता है। लेकिन इस बार मामला कुछ उल्टा पड़ रहा है। अफसरी करने वाले अब अवसरी की तलाश में हैं, कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए, इसी चिंता में साहबान बड़े ध्यान से निर्णय ले रहे हैं। मगर बावजूद इसके गड़बड़ भी हो रही है और अवसरी भी हाथ से जा रही है। ऊपर से सालों-साल बनी बनाई इमेज भी खराब हो रही है। कई जिलों के साहबान की कलेक्टरी अभी तलक आदर्श आचार संहिता की भेंट चढ़ चुकी है। ऐसे ही एक साहब का ट्रांसफर हो गया। हालांकि कलेक्टर साहब अच्छा काम कर रहे थे, जनता की नजर में रॉबिनहुड जैसा किरदार था उनका। लेकिन नेतानगरी की चपेट में आ गए, शिकवा-शिकायत में निपट गए। अब वहां की जनता ने मोर्चा खोल दिया है, साहब को मत बदलो, नेताजी को बदल दो। अब अभागी जनता को कौन समझाए, नेता बदलने का काम रियाया का है और वो दिन भी नजदीक है, कर लेना अपने मन की। …खबरची