कोल प्रभारी बीके राय ने कहा, मजदूरों का भरोसा बढ़ाने जांच जरूरी

परासिया, 28 अक्टूबर। भारतीय मजदूर संघ के कोल, नान कोल और स्टील प्रभारी डा बीके राय ने नेहरिया खदान के दौरे के बाद इसकी न्यायायिक जांच की मांग की। बीएमएस कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने नेहरिया खदान में दुर्घटना में मारे गए चार कामगारों के खदान, कोयला उद्योग पर असर, घटना की परिस्थितियों पर बात कर सिटिंग जज से दुर्घटना की जांच की मांग की। इस आषय का पत्र भारत सरकार, कोल सचिव, कोयला मंत्री को बीएमएस ने भेजा है। डा राय ने कहा कि इस दुर्घटना का मानसिक असर कोयला खदान के मजदूरों पर पडा है। भूमिगत खदान को लेकर मजदूरों में भरोसा बढाने न्यायायीक जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भूमिगत खदानों से उत्पादन जरूरी है क्योंकि ओपन कास्ट खदानों से कोयला उचित गुणवत्ता का नहीं मिलता है। ऐसे में दुर्घटनाओं को लेकर भूमिगत खदानों को बदनाम किया जा रहा है। नेहरिया खदान की दुर्घटना मानवीय चूक को उजागर करती है। न्यायायिक जांच के परिणामों के माध्यम से बीएमएस भूमिगत खदानों में काम पर उठे प्रष्न चिह्न को खत्म करना चाहता है। मजदूर इस दुर्घटना से हतोत्साहित हुआ है। उन्होंने बताया कि नेहरिया की दुर्घटना मानवीय चूक का नतीजा है। प्रकृति के अनुसार यहां काम नहीं किया गया।
बडकुही केंद्रीय नहीं, उन्नत अस्पताल बनेगा
बडकुही को केंद्रीय अस्पताल बनाए जाने की स्थिति को डा बीके राय ने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्री ने बडकुही अस्पताल को अपग्रेड करने की घोषणा की है। वेकोलि में तीन अस्पताल अपग्रेड किए जा रहे है। बडकुही, कामठी और वणी के अस्पताल को अपग्रेड करने के लिए तीन करोड रुपए का अलाटमेंट कर दिया गया है। कोल इंडिया के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के लिए इंटरव्यू किए जा रहे है। 568 पदेां के विरुद्ध तीन हजार आवेदन आए है। कंपनी ने नवंबर तक अस्पतालों में चिकित्सकों की नियुक्ति पूरी करने का वादा किया है। इसके बाद भी कोई पद रिक्त रहते है तो वाक इन इंटरव्यू किया जाएगा।
लागू नहीं है कमर्षियल माईनिंग
डा बीके राय ने निजी कोयला खदान मालिक को कोयला बेचने के निर्णय कमर्षियल माईनिंग के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कमर्षियल माईनिंग सरकार की सोच है। उनके चुनावी एजेंडे के अनुसार सरकार यह चाहती है। लेकिन यह एक विचार है जो धरातल है और लागू नहीं है। न कभी यह लागू हो पाएगा। उन्होंने कहा कि अडानी अंबानी खदान नहीं चला सकते। अडानी से विदेष में खदान सरेंडर कर दी। खदान को केवल कोल इंडिया ही चला सकती है।
विश्व की सबसे बड़ी कंपनी बनाने हंै प्रतिबद्ध
उन्होंने कहा कि सरकार कोल इंडिया को दुनिया की सबसे बडी खनन कंपनी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी नीति के तहत काम किया जा रहा है। सरकार की सोच इस दिषा में सकारात्मक है। विपक्ष सरकार को जबरन बदनाम कर रहा है।
273 नहीं 37 खदानें बंद होगी
डा राय ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि कोल इंडिया की 273 खदानें बंद की जा रही है। सिर्फ 37 खदानें इस सूची में है। जिसमें से एसईसीएल की 10 खदानें पहले ही बंद थी। खदानें सुरक्षा, कोयला खत्म होने और आर्थिक घाटे के कारण बंद की जाती है। सरकार ने तय किया है कि एक सीमा से ज्यादा घाटा देने वाली खदान बंद की जाएगी। जब मजदूरों को दसवा वेतन समझौता दिया जा सकता है तो ये मजदूरों की भी जवाबदारी है कि वे जितना वेतन मिलता है उतना काम जरूर करे और उत्पादित माल की सुरक्षा भी देखे।
देष में कोयले की भारी कमी
डा राय ने बताया कि देष में कोयले की भारी कमी है। कोयला होने के बाद भी कोल इंडिया उत्पादन नहीं कर पा रही है। विदेषों से कोयला मंगाया जा रहा है। सारणी, सिंगाजी और संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट में कोयला कुछ ही दिनों का शेष है।