कंपनी को 258 करोड़ का झटका

ऋषिकांत (रजत) परिहार (09425002527)
भोपाल,२८ अक्टूबर। प्रदेश में जहां एक और रबी के सीजन में बिजली की डिमांड पीक पर है, वहीं सरकारी बिजली घर इस बड़ी हुई डिमांड को पूरा करने में सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ऐसा इसलिए कि जेनको के पावर प्लांट अपनी क्षमता से करीब 63.80 प्रतिशत ही बिजली उत्पादन कर रहे हैं। अर्थात जेनको की कुल उत्पादन क्षमता 4080 मेगावाट है तो कंपनी महज 2603 मेगावाट ही बिजली बना पा रही हैं।
जेनको को इस वित्तीय वर्ष में मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय मापदंडों पर पावर प्लांटों से बिजली उत्पादन नहीं कर पाने के कारण लगभग 258.04 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ हैं। जिसकी भरपाई कर पाना कंपनी प्रबंधन के लिए बेहद कठिन हैं। बताया जा रहा है कि उक्त हानि के पीछे की मुख्य वजह कोयले के उचित प्रबंधन के आभाव और तकनीकी प्रशासनिक दक्षता के आभाव का कारण हैं। जबकि वर्तमान में लगातार रबी सीजन में डिमांड प्रतिदिन 11200 मेगावाट के ऊपर जा रही है,ऐसे में जेनको के प्लांट मात्र 2606 मेगावाट बिजली बना पा रहे हैं। खास बात यह है कि सभी सरकारी बिजली घरों में कोयले की समस्या लंबे समय से बनी हुईं हैं। पावर प्लांटों की स्थिति रोज लाओ और रोज खाओ जैसी है। जेनको के एमडी अनूप कुमार नंदा को बने 8 माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन अभी तक कंपनी में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया है। एमडी नंदा भी कोयले की इस जटिल समस्या को दूर नहीं कर पाए हैं।