मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018:किसानों का मुद्दा गायब, अब बेरोजगार नौजवान कहते हैं

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश  में 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए देश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दल जिसमें भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चेहरे को चौथी बार मैदान में उतारकर चुनाव लड़ रही है वहीं दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 72 वर्षीय 9 बार छिंदवाड़ा से चुने गए सांसद कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर शिवराज को चुनौती देने के लिए सामने खड़ा कर दिया है। दोनों दलों को आज की तारीख में राष्ट्रीय न्यूज चैनलों के अलग- अलग सर्वे ने ऊपर- नीचे बताया है। मुद्दा सर्वे के दरम्यान ज्यादातर किसानों से जुड़ा रहा और सर्वे किसानों के मुद्दे को लेकर कभी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान चौथी बार सरकार बना लेंगे और कभी यह भी निष्कर्ष आया कि कमलनाथ ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया की जोड़ी मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। लेकिन राष्ट्रीय हिन्दी मेल की टीम ने मध्यप्रदेश के केवल एक वर्ग जिसे हम नौजवानों का वर्ग कह सकते हैं, जहां कोई जाति नहीं है और जहां कोई अमीर अथवा गरीब नहीं है, इसका पुख्ता सर्वे किया है। हमारे सर्वे के अनुसार हमने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का चेहरा रखकर बेरोजगार नौजवानों से पूछा तो 100 नौजवानों में से 45 लोगों ने यह कहा कि उन्हें शिवराज मामा से बड़ी उम्मीदें हैं लेकिन 13 वर्षों में बेरोजगारों के लिए मध्यप्रदेश में बहुत कुछ नहीं हो पाया इसलिए हम निराश जरूर हैं लेकिन बेहतर मुख्यमंत्री अभी भी हमारे लिए शिवराज हो सकते हैं लेकिन उन्हें बेरोजगारी भत्ते की घोषणा अपने चुनाव घोषणा पत्र में करनी होगी और यह कदम शिवराज सिंह चौहान के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के बेरोजगारों के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगा। दूसरी ओर 40 प्रतिशत नौजवानों ने कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से उम्मीद जताई है और कहा है कि कांग्रेस भी यदि अपने चुनाव घोषणा पत्र में बेरोजगारी भत्ता देने की बात करे और युवा बेरोजगारों को क्रेडिट कार्ड उस समय तक के लिए उपलब्ध करा दे जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिलता है तो मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन भी हो सकता है। 15 प्रतिशत बेरोजागर नौजवान ऐसे भी मिले, जिन्होंने बेरोजगारी भत्ता के बजाय उद्योगों का जाल बिछाने का और सरकारी नौकरियों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाली पार्टी को समर्थन देने की बात कही। बेरोजगारी भत्ता की मांग जबर्दश्त इसलिए भी है क्योंकि मध्यप्रदेश में एक करोड़ से ऊपर बेरोजगार पढ़े- लिखे नौजवान आज
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