शताब्दी एक्सप्रेस में टी-18 आधुनिक रैक से आरामदायक होगा सफर

भोपाल, २९ अक्टूबर। आगामी दिसंबर महीने में शताब्दी एक्सप्रेस को टी-18 के नाम आधुनिक रैक मिलेगा। भोपाल के हबीबगंज स्टेशन से नई दिल्ली के बीच चलने वाली इस एक्सप्रेस गाडी के आधुनिक रैक में दोनों तरफ घूमने वाली चेयर (मूवेबल चेयर) लगी है, जो यात्रियों के सफर को ज्यादा आरामदायक बनाएंगी। इसके अलावा भी रैक में मौजूदा रैक की तुलना में कई सुविधाएं अतिरिक्त होंगी। यात्रियों को फटी हुई सीट व टेप लगे कांच वाले रैक से छूटकारा मिल मिलेगा।
इस आधुनिक रैक का पहला ट्रायल 29 अक्टूबर से शुरू होना है। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चैन्नई में पहला रैक तैयार हो चुका है। इसे मेक इन इंडिया योजना के तहत पहले स्वदेशी के रूप में तैयार किया है। ट्रायल अलग-अलग चरण में होगा। इसमें एक महीने लगेंगे। कोई बड़ी तकनीकी कमी नहीं मिली तो ट्रेन को दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में नई दिल्ली से हबीबगंज के बीच चलने वाली शताब्दी के रैक से रिप्लेस कर देंगे। एक कोच में 6 सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। मनोरंजन के लिए सभी कोच में एलईडी लगी होंगी।
आपात स्थिति में यात्री लोको पायलट से बातचीत कर सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक कोच में टॉक बैक सुविधा दी गई है। यात्रियों को मुफ्त वाईफाई सुविधा मिलेगी। गेट स्वचलित होंगे, जिन्हें खोलने व बंद करने की जरूरत नहीं होगी। कोच आपस में जुड़े हुए होंगे। सीटों के बीच अधिक गेप होगा, कोच में बड़े कांच लगे होंगे। जीपीएस आधारित सूचना प्रणाली सिस्टम स्टेशनों की जानकारी देगा। वैक्यूम बायो टॉयलेट होंगे। कोच के भीतर ही दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर रखीं होंगी। यात्री जरूरत के हिसाब से सामान लेकर चल सकेंगे। इंजन अलग से नहीं लगेगा, बल्कि कोच के दोनों तरफ ड्राइविंग कैबिन होंगे। प्रत्येक कोच बिजली से ऊर्जा पैदा कर चलने में सक्षम होंगे।
इस रैक 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम हैं, लेकिन इसे नई दिल्ली से हबीबगंज के बीच करीब 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाना है। कोचों की अंदरूनी बनावट स्टील की होगी, जो स्क्रू रहित होगी। हादसा होता भी है तो यात्रियों को कम चोटें आएंगी। सेंटर बफर कपलर लगे होंगे, हादसे के दौरान कोच एक-दूसरे पर नहीं चढ़ेंगे। चुनावी साल होने के कारण इस रैक पर अन्य जोन की भी नजर हैं। ऐसे में आखिरी समय में इस रैक को चलाने में बदलाव होने की संभावना भी है।