पढ़ाई छोड़ दूसरे कार्यों में व्यस्त हंै सरकारी शिक्षक

भोपाल, २९ अक्टूबर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक स्तर सुधरे तो कैसे, क्योंकि स्कूलों के शिक्षक दूसरे सरकारी कामों में व्यस्त है। आधा शैक्षणिक सत्र निकल चुका है लेकिन मात्र 25 फीसदी कोर्स ही बच्चे पढ़ पाए हैं। इन हालातों में बच्चे अपना रिजल्ट कैसे सुधार पाएंगे, इसका जवाब शायद सरकार के पास भी नहीं है। सरकारी शिक्षकों से चुनाव ड्यूटी से संबंधित कार्यों और जनशिक्षा केंद्रों पर समग्र आईडी का मैपिंग कार्य करवाया जा रहा है।
इस कार्य में एक स्कूल से दो-दो शिक्षक लगे हुए हैं। इसके अलावा स्कलों में शिक्षकों की कमी पहले से ही चल रही है। 1 अप्रैल से स्कूल शुरू तो हुआ, लेकिन सबसे पहले बेसलाइन टेस्ट आयोजित किया गया। इसमें बच्चों का मूल्यांकन जून तक चलता रहा। इसके बाद ब्रिज कोर्स के जरिए उनके बेसिक को क्लियर किया गया। अगस्त से अक्टूबर तक मिडलाइन टेस्ट लिया जा रहा है। इसमें टेस्ट लेने से लेकर मूल्यांकन कार्य शिक्षक करते रहे। वहीं सरकारी स्कूलों में जितने शिक्षकों के स्वीकृत पद हैं, उससे कम शिक्षक हैं। इस पर डेढ़ हजार शिक्षकों और शिक्षा से संबंधित 80 फीसदी स्टाफ को चुनावी कार्य में लगाया गया है। इसके बाद समग्र आईडी के मैपिंग कार्य के लिए बीआरसी केंद्रों पर भी शिक्षकों को लगाया गया है।
वहीं स्कूलों में एप्टीट्यूड टेस्ट, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में शिक्षकों की ट्रेनिंग के कारण भी स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अभी तक आधा कोर्स पूरा होना चाहिए था, लेकिन कुछ विषयों को छोड़कर कोर्स की शुरुआत भी नहीं हुई है, जबकि दिसंबर में छमाही परीक्षा होगी। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, उनमें अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक नहीं की गई है। इससे स्कूलों में प?ाई प्रभावित हो रही है।
जिले में करीब 6 हजार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है। राजधानी में 65 संकुल केंद्र पर भी कई शिक्षक लगे रहते हैं। जहां पर शिक्षक पढ़ाने के बजाय बाबूगिरी के कार्य में लगे हैं, जबकि ब्लॉक एजुकेशन केंद्र, जिला शिक्षा कार्यालय, ब्लॉक परियोजना समन्वय केंद्र बने हैं। इसके बावजूद संकुल केंद्र में निजी स्कूलों के कार्य निपटाए जाते हैं, जहां पर सरकारी स्कूलों के लगभग 300 शिक्षक बाबूगिरी में लगे हैं।
इन दिनों स्कूलों में मिडलाइन टेस्ट की रिपोर्ट बनाने व सीसीई प्रशिक्षण के कारण भी स्कूलों में प?ाई नहीं हो पा रही है। पहले तो शिक्षकों ने मिडलाइन टेस्ट लिया और अब उसकी रिपोर्ट तैयार कर भेजना है। इस कार्य में शिक्षक व्यस्त हैं। इसके बाद हर शनिवार को बाल संसद और स्कूलों में मतदान निर्वाचन क्लब के जरिए भी कई एक्टिविटी शिक्षकों द्वारा कराई जा रही हैं, जिससे पढ़ाई नहीं हो पा रही है। इस संबंध में डीईओ धर्मेन्द्र शर्मा का कहना है कि यह सही है कि कोर्स पूरा नहीं हो पाया है।
हाईस्कूल और हायर सेकंडरी के लिए अलग से कक्षाएं लगाई जाएंगी। साथ ही 1 नवंबर से उत्कृष्ट विद्यालय में तिमाही परीक्षा में गणित और अंग्रेजी में कम अंक लाने वाले बच्चों को भी अलग से पढ़ाया जाएगा।