शुक्र उदय होने से समृद्धि देगी दीवाली,59 साल बाद मालव्य योग

रायसेन, 29 अक्टूबर। दीपावली बुधवार 7 नवंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिष के अनुसार इस दिन विशिष्ट योग बन रहा है। गुरु,मंगल के स्वामित्व वाली राशि वृश्चिक में होगा। मंगल,शनि की स्वामित्व वाली राशि कुंभ में होगा और शनि,गुरु के स्वामित्व वाली राशि धनु में होगा। इसके अलावा शुक्र अपनी स्वयं की राशि तुला में रहेगा। शुक्र का अपनी राशि में होना मालव्य योग बना रहा है। 59 साल बाद इस योग में दीपावली मनेगी। बुधवार होने से शुभ और स्वाति नक्षत्र होने से सुखद वातावरण में दीपावली मनेगी। जानकारी के अनुसार इसके पहले 1 नवंबर 1959 को दीपावली पर गुरु वृश्चिक में एवं शनि धनु राशि में था तब दीपावली मनी थी। उन्होंने बताया कि इस बार दीपावली के पहले 1 नवंबर को शुक्र उदय हो जाएगा। मंगल-केतु की युति भी समाप्त हो जाएगी जिससे शांति होगी। स्वाति नक्षत्र होने से यह सुखद वातावरण बनाएगा। यह सब ग्रह योग दीपावली को व्यापार के लिए उत्तम बनाएंगे। शुक्र का अपनी स्वयं की राशि में होना देश में ऐश्वर्य,वैभव एवं विलासिता बढ़ाने के साथ,व्यापार,उद्योग को बढ़ाने वाला होगा।
सूर्योदय के पहले उठने से होगा भाग्योदय
24 अक्टूबर शरद पूर्णिमा से कार्तिक शुरू हो गया है। व्रत,उत्सव और खास त्योहार इसी महीने में आते हैं। देवउठनी ग्यारस से मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है और चातुर्मास समाप्त होता है। कार्तिक में राधा-दामोदर पूजन का खास महत्व है। इनके पूजन से प्रेम,स्नेह और भक्ति की प्राप्ति होती है। भगवान को तुलसी,मालती,कमल व अगस्त्य के फूल चढ़ाने चाहिए। इस महीने में सूर्योदय के पहले उठकर तीर्थ स्नान करें व राधा-दामोदर का पूजन करें तो भाग्य खुलता है। रुके कार्य शुरू होते हैं।
कार्तिक में तीज-त्योहार
24 अक्टूबर कार्तिक स्नान शुरू,शरद पूर्णिमा 27 अक्टूबर करवा चौथ,31 अक्टूबर बुध पुष्प,5 नवंबर सोम प्रदोष, धन तेरस ,6 नवंबर रूप चौदस,7 नवंबर दीपावली,8 नवंबर गोवर्धन पूजा,अन्नकूट,9 नवंबर भाईदूज, यम द्वितीया ,13 नवंबर सूर्य षष्टि, छठ पूजा,16 नवंबर गोपाष्टमी,17 नवंबर आंवला नवमी,19 नवंबर देवउठनी ग्यारस आदि कार्तिक महा में तीज त्योहार आएंगे।