कमलनाथ, दिग्विजय सिंह साथ चलेंगे और सिंधिया रहेंगे आगे-आगे

कांग्रेस में कितने भी विवाद हों, 2018 विधानसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी ने बनाई रणनीति और तय किया है

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश में 15 वर्षों से वनवास भोग रही कांग्रेस पार्टी की सत्ता में लौटने की तड़प अब किसी से छिपी नहीं है। पिछले 2 दिनों से टिकट बंटवारे को लेकर नई दिल्ली में केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में हुए घमासान की खबर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हड़कंप का माहौल है। उनका मानना है कि जब सारे बड़े नेता इस आधार पर टिकट का बंटवारा करेंगे कि कौन अपना है, कौन पराया तो फिर कांग्रेस 10 साल और सत्ता से बाहर रहेगी। टिकट बंटवारे को लेकर चुनाव समिति में बताया जाता है कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह तीनों ने मिलकर ऐसा त्रिकोण बना लिया है कि उनकी हर दलील को मानने के लिए मध्यप्रदेश केन्द्रीय चुनाव समिति के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री मजबूर हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार जब इसकी भनक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लगी, तब उन्होंने फरमान जारी कर दिया और साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि यह तीनों नेता अपना-अपना भविष्य तय कर लें। कांग्रेस का भविष्य तब तक उज्ज्वल नहीं हो सकता, जब तक चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया का चेहरा मध्यप्रदेश की जनता के सामने बार-बार प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अत्यंत गंभीर हैं, उन्होंने तय किया है कि टिकटों के मामले में प्राथमिकता ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश को ही दी जाएगी, लेकिन उन्होंने यह भी निर्णय किया है कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जोड़ी के बिना ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अकेले मुकाबला नहीं कर पाएंगे। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के पोस्टर ब्वॉय शिवराज सिंह चौहान की संबल योजना को लेकर उसे काउंटर करने की रणनीति बनाने के लिए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से योजनाबद्ध तरीके से काम करने को कहा है। राहुल गांधी मानते हैं कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक शिवराज सिंह चौहान की आम आदमी वाली छवि से कांग्रेस आज भी घाटे में है और इस घाटे से उबरने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया एकमात्र भीड़ जुटाऊ नेता हैं। इससे समझा जाता है कि मध्यप्रदेश में कल से प्रारंभ होने वाली राहुल गांधी की मध्यप्रदेश यात्रा में दिग्विजय, कमलनाथ साथ-साथ तो चलेंगे, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया राहुल गांधी का हाथ पकड़कर आगे-आगे चलेंगे। इस रिपोर्ट का लब्बेलुआब यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी किसी भी वक्त मध्यप्रदेश के दौरों के दरम्यान ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट कर सकते हैं और उनकी इस रणनीति में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को कोई आपत्ति इसलिए नहीं होगी क्योंकि कमलनाथ ने पहले ही घोषणा कर दी है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने, यह उनकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह बाद में ही तय होगा।