बड़े बे-आबरू होकर… 

 

देश की एक प्रमुख राजनैतिक पार्टी, जो संस्कारी और देश भक्त भी कहलाती है। लेकिन इस पार्टी में पिछले कुछ अर्से से उम्रदराज हो चुके अनुभवी नेताओं को हाशिए पर धकेलने के आरोप लग रहे हैं। सूबे में इलेक्शन चल रहे हैं, लिहाजा इन मार्गदर्शक मंडल के नेताओं के टिकट पर भी पेंच फंसना लाजिमी था। गोया इन्हें बढ़ती उम्र का हवाला बताकर ही कबीना से बाहर किया गया था। हालिया पेंच यह है कि प्रधान कह गए थे कि एक बार और, सो चुनाव का मन बना लिया और मन की हसरत भी उठ गयी, लेकिन खबर ये है कि पार्टी के थिंक टैंक ने उन्हें सूबे की राजधानी से ऐसी विधानसभा से लडऩे को कहा है, जहां पार्टी कभी जीती ही नहीं। जाहिर है साहब मना करेंगे ही और इसी बिना पर उन्हें टिकट भी नहीं मिलेगा। अब गौर करने वाली बात यह है कि साहब को कौन समझाए, अब राजनीति का दूसरा नाम ही झूठ और फरेब है, बाकी सब मिथ्या।        …खबरची