महापुरुषों की प्रशंसा पर भी होती है हमारी आलोचना : मोदी

गांधी नगर, 01 नवम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में केवडिया में सरदार वल्लभभाई पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया। देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल की जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने देशवासियों को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की सौगात दी है। इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने देश को एकीकरण के सूत्र में पिरोने वाले सरदार पटेल की तारीफ की। वहीं, उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा-महापुरुषों की प्रशंसा करने पर भी हमारी आलोचना की जाती है।
ठ्ठ आज जो हुआ, वो इतिहास में दर्ज हो गया है और इसे इतिहास से कोई मिटा नहीं पाएगा।
ठ्ठ मुझे लोहा अभियान के दौरान लोहे का पहला टुकड़ा भी सौंपा गया है। मैं गुजरात के लोगों के प्रति कृतज्ञ हूं। मैं इन चीजों को यहीं पर छोड़ूंगा, ताकि देश इसे देख सके।
ठ्ठ यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सरदार साहब की इस विशाल प्रतिमा को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है।
ठ्ठ जब मैंने गुजरात के सीएम के तौर पर इसकी कल्पना की थी तो एहसास नहीं था कि एक दिन प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे इसके अनावरण का सौभाग्य मिलेगा।
ठ्ठ इस प्रतिमा के निर्माण के लिए लाखों किसान साथ आए और अपने औजार और मिट्टी देकर अपने हिस्से का योगदान दिया।
ठ्ठ सरदार साहब के आह्वान पर देश के सैकड़ों रजवाड़ों ने त्याग की मिसाल कायम की थी। हमें इस त्याग को भी कभी नहीं भूलना चाहिए।
ठ्ठ सरदार साहब ने संकल्प न लिया होता, तो आज गिर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ में पूजा करने के लिए और हैदराबाद चार मीनार को देखने के लिए हमें वीजा लेना पड़ता।
ठ्ठ स्टैचू ऑफ यूनिटी हमारे इंजीनियरिंग और तकनीकी सामर्थ्य का भी प्रतीक है। बीते करीब साढ़े तीन वर्षों में हर रोज कामगारों ने, शिल्पकारों ने मिशन मोड पर काम किया है।
ठ्ठ कई बार तो मैं हैरान रह जाता हूं, जब देश में ही कुछ लोग हमारी इस मुहिम को राजनीति से जोड़कर देखते हैं।
ठ्ठ सरदार पटेल जैसे महापुरुषों, देश के सपूतों की प्रशंसा करने के लिए भी हमारी आलोचना होने लगती है। ऐसा अनुभव कराया जाता है मानो हमने बहुत बड़ा अपराध कर दिया है।