सफाई देते-देते गला सूखा 

चुनावी मौसम आते ही सबसे ज्यादा फजीहत नेताओं की हो रही है। विरोधी ऐसे-ऐसे पत्र फोटोशॉप से एडिट कर जारी कर रहे हैं कि अच्छे-अच्छे धुरंधरों को भी पसीना आ रहा है। सोशल मीडिया पर सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता का पत्र खूब जमकर वायरल हुआ। इस कथित पत्र में जो भाषा लिखी गई है और जिसके लिए लिखी गई है, उसे पढ़कर लोगों ने खूब चटखारे भी लिए। जब मामला तूल पकडऩे लगा तो नेता जी के पास दिल्ली से लेकर नागपुर तक से फोन घनघनाने लगे। साहब सफाई दे-देकर थक गए कि यह पत्र मैंने नहीं लिखा, विरोधियों की चाल है। उसके बाद मीडिया के भी फोन आना शुरू हुए, हालत यहां तक पहुंच गए कि सफाई देने की जगह नेताजी झुंझलाने लगे। खबरनवीसों को साहब की भन्नाहट में भी ब्रेकिंग मिल गयी। चूको मत चौहान की तरह सभी पीछे ही पड़ गए। थक-हारकर  उन्होंने कानूनी कार्यवाही करने की घोषणा कर दी। अब क्या कार्यवाही होगी, देखना दिलचस्प होगा, लेकिन इतना जरूर था कि विरोधियों को आनन्द आ ही गया होगा। …खबरची