90 ट्रेनी अधिकारियों के सेमीनार का हुआ आयोजन

नगर संवाददाता
भोपाल, 4 नवंबर। राजधानी स्थित आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी भोपाल में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 45 एवं भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 25 एवं अन्य भारतीय सेवाओं के (आईआरएस) (आईडीईएस) (आईडीएएस) कुल 90 प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वहन जनहित को ध्यान में रखते हुए रुल ऑफ लॉ के अनुसार निष्ठापूर्वक प्रसन्नचित एवं आनंदित होकर नवीन उत्साह एवं संचार के साथ पूर्ण करने हेतु कहा गया।
इस दोरान सेमिनार मे सीनीयर आईपीएस अफसर डीसी सागर द्वारा वहॉ उपस्थित प्रशिक्षुओं को कर्तव्यबोध कराने के लिए 04 पीपीटी प्रजेण्टेशन के माध्यम से उदबोधन/व्याख्यान दिया गया जिसमें अदालतों द्वारा मौत कि सजा को आजीवन कारावास मे बदलने के विषय पर अपराध क्रमांक 84/17 मध्यप्रदेश राज्य द्वारा आरक्षी केन्द्र बांदरी जिला सागर विरूद्ध सुनील आदिवासी विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 16/17 धारा 376्र, 302, 342, 201/511 भारतीय दण्ड संहित, 5/6 पोस्को एक्ट के प्रकरण में न्यायालय द्वारा पारित निर्णय को रेखांकित कर अपने विचार रखे। पुलिस- रोल एंड इमेज (मीडिया, प्रिंटमीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया,जनता, पुलिस एवं प्रशासन) को विभिन्न उदाहरणों से स्पष्ट किया गया। इस दोरान अफसरो ने राजधानी के थाना टीटीनगर भोपाल के अपराध क्रमांक 105/2013 धारा 302, 201, 366-ए, 363, 376 आईपीसी एवं 5/6 पास्को एक्ट के एक प्रकरण (काजल हत्याकाण्ड) के बारे मे उदाहरण दिया जिसमें आरोपी को मात्र 09 दिवस में मृत्युदण्ड की सजा सुनाई गई। थाना जीआरपी भोपाल (हबीबगंज) के अपराध क्रमांक 182/17 प्रकरण के निर्णय पर प्रकाश डालते हुए यह समझाने की कोशिश की गई कि अगर पुलिस के पास कोई फरियादी या पीडित आये तो पुलिस को फरियादी/पीडित की रिपोर्ट के आधार पर तुरन्त कार्यवाही करनी चाहिए। पीडित/ पीडि़ता का मेडीकल परीक्षण डॉक्टर के द्वारा विधिसम्मत तरीके से पैनल के माध्यम से किया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त सागर द्वारा वहॉ उपस्थित प्रशिक्षु अधिकारियों को महत्वपूर्ण ध्यान रखने योग्य बातें भी बताई कि जैसे ही घटना घटित होती है वैसे ही संबंधित थाना प्रभारी को घटनास्थल पर जाना चाहिए एवं इसकी सूचना पर्यवेक्षक अधिकारी जैसे – एसडीओपी, एड. एसपी, एसपी, डीआईजी, आईजी को देना चाहिए। उन्होन यह भी बताया कि पर्यवेक्षक अधिकारी का यह कर्तव्य है, कि गंभीर अपराध की सूचना प्राप्त होने पर वह स्वयं घटनास्थल पर पहॅुचे एवं विवेचना अधिकारी को मार्गदर्शन दें। एफएसएल के वैज्ञानिक अधिकारी को अनिवार्यत: घटनास्थल की सूचना दें जिससे जिला सीन ऑफ क्राईम मोबाइल यूनिट के वैज्ञानिक अधिकारी के दिशा निर्देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से साक्ष्य संकलन का कार्य किया जा सके।