कांग्रेस के पांच पांडवों ने बांट लिए अपने -अपने किरदार, अब सवाल …

राहुल गांधी की फटकार का असर , सभी एक हुए और
विशेष संपादकीय विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए चार दिन और चार रातों की लगातार माथापच्ची , गुटबाजी के झगड़े , अपने-अपने समर्थकों के लिए अड़े सभी नेता अंतत: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की फटकार के सामने बौने हो गए और सबने मिलकर यह तय किया कि चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के फार्मूले को मान लेने में ही कांग्रेस की भलाई है। इसी के चलते मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पांच बड़े दिग्गज नेता जिसमें सबसे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ फिर दूसरे नंबर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया तीसरे नंबर पर दिग्विजय सिंह चौथे नंबर पर सुरेश पचौरी और पांचवें नंबर पर अजय सिंह को पांच पांडवों की भूमिका में आकर महाभारत जीतने का संकल्प लेना पड़ा। हालांकि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में सुरेश पचौरी को जगह नहीं मिली थी लेकिन उनके पैरोकार अहमद पटेल ने सुरेश पचौरी के समर्थकों का ख्याल रखते हुए कांग्रेस की एकजुटता को राहुल गांधी के पक्ष में अंजाम देने में अहम भूमिका निभायी है। आज कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में 155 उम्मीदवारों की घोषणा काफी मशक्कत के बाद की है, इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि कमलनाथ ने पुराने परंपरागत कांग्रेसियों को मौका देने का प्रयास किया है तो दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिताऊ उम्मीदवारों को टिकट दिलवाने में गुटबाजी से अलग हटकर अपने सकारात्मक रवैये और सामंतशाही प्रवृति से बाहर आकर आमजनता की भावनाओं के अनुरुप कुछ अच्छा करने का प्रयास किया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह एक दूसरे की हां में हां मिलाकर बताया जाता हैं कि अपने कट्टर समर्थकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे वहीं दूसरी ओर सुरेश पचौरी ने अपने समर्थक होने का दावा ना करते हुए जीतने वाले उन उम्मीदवारों को मदद की जो 2008 से उनके संपर्क में लगातार बने रहे और कांग्रेस में मैदानी स्तर पर जुटे रहे। कुल मिलाकर राहुल गांधी ने 2018 विधानसभा चुनाव के महाभारत के लिए पांच पांडवों को जिम्मेदार बना दिया है, ऐसा कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। लेकिन कार्यकारी अध्यक्षों में जीतू पटवारी और अरुण यादव के साथ-साथ कांतिलाल भूरिया के पुत्र विक्रांत भूरिया की भूमिका का उपयोग करना सही निर्णय माना जा रहा है। इन सबके बावजूद कांग्रेस के सामने बड़ा सवाल यह है कि 2018 विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के पोस्टर ब्वॉय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि पिछले छह महीनों से गली-गली, गांव-गांव घूमकर शिवराज ने जो डंका बजाया है उसकी आवाज को दबाने के लिए ना तो राहुल गांधी के पास उतना समय है और ना ही इन पांच पांडवों के पास। यूं कहा जाए कि अब ये पांच पांडव अपने-अपने इलाकों को भी यदि सम्भाल लेते है तो चुनाव जीते अथवा नहीं, 2013 के मुकाबले में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद तो की जा सकती है। जहां तक सवाल है सरकार की किसकी बनेगी अब इसका उत्तर मीडिया के किसी वर्ग के पास नहीं है। शिवराज सिंह चौहान भी जनता से पूछ रहे हैं कि भाजपा को , नरेन्द्र मोदी जी को मध्यप्रदेश में जीताएंगे कि नहीं और दूसरी ओर कमलनाथ-सिंधिया के सामने अभी भी यह सवाल अधर में इसलिए है क्योंकि अभी भी 75 बाकी है।