इस बार भी मालवा -निमाड़ ही तय करेगा प्रदेश में किसकी सरकार

सुनील दत्त तिवारी/9713289999
भोपाल 20 नवंबर। पिछले तीन विधानसभा चुनाव से मध्यप्रदेश में सत्ता की चाबी सौपने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र में इस बार भी दोनों राजनैतिक दलों की दृष्टि लगी हुई है। दरअसल ,छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद होने वाले तमाम विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश का यह अंचल ही तय करता है कि किसकी सरकार प्रदेश में बनेगी। मालवा-निमाड़ में 66 विधानसभा सीटें हैं। 2013 के चुनाव में 57 भाजपा के पास थीं और कांग्रेस के कहते में सिर्फ 9 कांग्रेस ही सीट आई थीं।
कहना होगा की राजनैतिक रूप से अति संवेदनशील और जागरूक मालवा-निमाड़ के मतदाता ही 2003 से मध्यप्रदेश का मुस्तकबिल लिख रहे हैं। भाजपा को 2013 में यदि प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिला तो इसमें 46 बढ़त वाली सीटों का बड़ा योगदान रहा है।लिहाजा भाजपा और कांग्रेस, दोनों की ही निगाहें मालवा-निमाड़ पर हैं। दोनों ही दल अपनी-अपनी ताकत का बड़ा भाग इस इलाके में झोंक रहे हैं।वैसे मालवा निमाड़ में संघ का बर्चस्व हमेशा ही रहा है और इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को ही हुआ है। लेकिन इस बार परिस्थियाँ थोड़ी दुश्वारी भरी हैं। भाजपा के लिए इस बार मालवा-निमाड़ में नतीजा दोहरा पाना आसान नहीं है। इसका बड़ा कारण किसान, जीएसटी और नोटबंदी है। मंदसौर गोलीकांड में पांच किसानों की मौत के बाद से किसान नाराज हैं। उन्हें जो दाम चाहिए, वो नहीं मिल रहा है।एट्रोसिटी एक्ट को लेकर भी लोगों के बीच असंतोष इस क्षेत्र में कुछ ज्यादा ही दिखा। इंदौर, धार, शाजापुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच, और अलीराजपुर को शिवराज मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। कांग्रेस ने किसानों के 2 लाख तक के कर्ज माफ़ करने का वादा कर उन्हें अपनी तरफ लाने की कोशिश की है।
भाजपा ने अधिकांश पुराने चेहरे चुनाव मैदान में उतारे हैं। कुछ स्थानों पर बागी भी डटे हुए हैं। इन सब से पार पाना और पुराने इतिहास को दोहराना भाजपा के कठिन साबित हो रहा है। वहीँ कांग्रेस पार्टी भी इस समर में अपना पूरा फोकस इसी अंचल में ही लगाए है। पार्टी के स्टार प्रचारक और चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बार टिकट वितरण में मालवा निमाड़ पर पूरा ध्यान दिया। एक एक प्रत्याशी को टिकट देने के पहले हर स्तर पर जीत की संभावना को भी परखा और जातिगत दृष्टिकोण को भी टटोला ,लिहाजा एक अच्छा विकल्प देने की पूरी कोशिश की गयी। राहुल गाँधी से लेकर पार्टी के तमाम दिग्गज माहौल बनाने में लगे हैं।
मतदान दिवस नजदीक आते आते दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दल मालवा निमाड़ को ही कुरुक्षेत्र बना दे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि सभी को पता है ,मालवा-निमाड़ मध्यप्रदेश का एक तरह से ‘किंगमेकरÓ है। जिस पार्टी को यहां कामयाबी हासिल होती है, उसी का राजतिलक होता है। बहरहाल ,राजनैतिक दलों को यह बात पूरी तरह से समझ में आ चुकी है कि इन 66 विधानसभा सीटों पर यदि तुक्का लग गया तो सरकार बनने में कोई कठिनाई नहीं आएगी ,बस इसी विश्वास के सहारे ही महासमर के इस अखाड़े में सारे दांव पेंच आजमाए जा रहे हैं।