हमरे वोटर ज्ञानवान

चुनाव का कोलाहल रुक गया है, 15 नवंबर से चुनावी अभियान में जुड़े नेताजी जो पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे, उन्हें पता चल गया कि नेता बनने की राह इतनी आसान है नहीं। अक्सर जनता को मूर्ख बनाने वाले नेताजी का पहली बार पाला सीधे-सीधे जनता से पड़ा तो आटा-दाल के भाव याद आ गए। दरअसल नेताजी चुनाव प्रचार के दौरान एक इलाके में पहुंच गए। खास समर्थकों को देखकर नेता महोदय का जोश बढ़ गया। लगे भोपाल से दिल्ली तक की बखान करने, ये भी बताने लगे कि चुनाव जीतते ही एक बड़ा परिवर्तन करा देंगे। आस-पास खड़ी जनता से ये बोल वचन सहन नहीं हुआ तो उन्होंने पूछ लिया कि मामला तो संविधान संशोधन से जुड़ा है, विधानसभा चुनाव में ये कैसे संभव है? नेताजी बगले झांकने लगे। बात तो सही थी। अब जनता के ज्ञान को देखकर साहब पतली गली से निकल गए। आखिर मामला ही ऐसा था।
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