विंध्य में बसपा ने बिगाड़े कांग्रेस के समीकरण

अब कांग्रेसी अफसरों पर फोड़ रहे हार का ठीकरा

हृदेश धारवार, 9755990990
भोपाल, 26 दिसंबर। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक दल चुनाव परिणाम की समीक्षा कर रहे हैं। प्रदेश में इस बार जो चुनाव परिणाम आए हैं, उससे कोई भी राजनीतिक दल संतुष्ट नहीं है। सभी अपने-अपने तरीके से हार-जीत की समीक्षा कर रहे हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को विंध्य क्षेत्र में बड़ा झटका लगा है। विंध्य क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार के चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए। जहां तक कि विंध्य के कद्दावर नेता व पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह। (राहुल भैया) को खुद हार का समना करना पड़ा। विंध्य में कांग्रेस को मिली हार को लेकर कांग्रेस नेताओं के आरोप हैं कि विंध्य के लगभग 11 जिलों में जो एसपी और कलेक्टर पदस्थ थे, उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों के साथ पक्षपात किया है और अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के समर्थन में काम किया है। इस वजह से कांग्रेस प्रत्याशियों को हार का समना करना पड़ा है। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ इस बात का मानने के लिए तैयार नहीं है। उन्हें लगता है कि यदि अधिकारी इतने बड़े स्तर पर काम करते तो चंबल, मालवा और निमाड़ के चुनाव परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते। विंध्याचल क्षेत्र में भाजपा ने पिछले चुनावों से कहीं अधिक बेहतर प्रदर्शन किया। यहां की 30 सीटों में से उसे 24 पर जीत मिली, जबकि 2013 के चुनाव में विंध्य में भाजपा का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा था। तब 30 में से 17 सीटें जीती थीं। इस बार 7 सीटें बढ़ी हैं। कांग्रेस को तब 11 सीटें मिली थीं और बसपा को 2 सीट। कांग्रेस को इस बार 5 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। बताया जाता है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में विंध्य क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच अंदरूनी समझौता हुआ था, जिसे कांग्रेस के नेता समझ नहीं पाए और बसपा का वोट भाजपा के पक्ष में डलवा दिया, जिसकी वजह से कांग्रेस को अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं मिले। अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिलने की वजह से अब कांग्रेसी अपनी हार का ठीकरा अधिकारी और कर्मचारियों पर फोड़ रहे हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन बहुमत नहीं जुटा सकी है। बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के सहयोग से सरकार बनाई है।
मालवा-निमाड़ अंचल में भाजपा ने पिछले चुनावों की अपेक्षा यहां 27 सीटों का नुकसान उठाया है तो कांग्रेस ने 26 सीटों को पाया है। निर्दलियों के खाते में भी पिछली बार की अपेक्षा एक सीट अतिरिक्त गई है। जबकि पिछले चुनावों में यहां की 66 में से 55 सीटें भाजपा ने जीती थीं, कांग्रेस इकाई अंक में 9 पर सिमट गई थी और निर्दलीय 2 सीट जीते थे। इस बार भाजपा को 27, कांग्रेस को 35 और निर्दलियों को 3 सीटें मिली हैं। महाकौशल में भाजपा बहुत पिछड़ गई और उसके खाते की 10 सीटें कांग्रेस ले गई। गौरतलब है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और कमलनाथ महाकौशल क्षेत्र से आते हैं। दोनों इसी क्षेत्र की अलग-अलग सीटों से सांसद भी हैं। इसलिए मुकाबला प्रदेश अध्यक्ष बनाम प्रदेश अध्यक्ष था, जिसमें कमलनाथ बाजी मार ले गये। अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा जिले की सभी 7 सीटें उन्होंने कांग्रेस को जिताई हैं। पहले यहां भाजपा की पास 4 सीटें थीं। पूरे अंचल की बात करें तो 38 सीटें हैं, कांग्रेस 23, भाजपा 14 और 1 निर्दलीय के खाते में गई। पिछली बार कांग्रेस 13, भाजपा 24 और1 निर्दलीय को मिली थी।