विधानसभा अध्यक्ष होंगे एनपी प्रजापति अरुण यादव बनेंगे प्रदेश अध्यक्ष

सुनील दत्त तिवारी
भोपाल, 26 दिसंबर। कांग्रेस पार्टी राहुल गाँधी के नेतृत्व में समावेशी राजनीति की नई परिपाटी पर काम कर रही है। इसके पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष कभी इस विचार को लेकर काम नहीं करते थे, लेकिन राहुल गाँधी ने कोई पुराना नेता या कार्यकर्ता असंतुष्ट नहीं हो, इसलिए खुद ही ससम्मान अपने निर्णयों से उसे अवगत कराते हैं। ठीक ऐसा ही मामला वरिष्ठ विधायक और अनुसूचित जाति के बड़े चेहरे एनपी प्रजापति के साथ भी हुआ। मंत्रिमंडल में स्थान न देकर विधानसभा अध्यक्ष बनाये जाने की सूचना खुद राहुल गाँधी के कार्यालय ने प्रजापति को दी, साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस आग्रह को स्वीकार कर लेने के लिए बोले इसके बाद यह तय हो गया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से गोटेगांव विधानसभा से वरिष्ठ विधायक एनपी प्रजापति इस पद के प्रत्याशी होंगे।
मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल के गठन के साथ ही कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नाम तय कर दिया है। अब विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर 17वें विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव कराएंगे, जिसमें प्रजापति कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल करेंगे। इसी बीच बुधवार को एनपी प्रजापति विधानसभा भवन पंहुचे और बतौर विधायक उन्होंने अपने प्रमाण पत्र भी जमा कराए। उन्होंने विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों से अनौपचारिक चर्चा भी की। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने पुष्पगुच्छ देकर प्रजापति का स्वागत किया।
कमलनाथ मंत्रिमंडल के शपथ लेने के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को लेकर लगाए जा रहे कयासों को विराम लग गया है। इनमें से तीन दावेदार कमलनाथ मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। इधर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव को एक बार फिर संगठन की कमान दिए जाने की तैयारी है। बताया जाता है कि इस बारे में विस्तार से चर्चा हुई है और कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह ने अरुण यादव को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर अपनी सहमति व्यक्त कर दी है। हालाँकि इस बारे में अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को ही करना है। लेकिन जिस प्रकार के सामंजस्य की राजनीति राहुल गांधी कर रहे हैं, उसमें न केवल परिपक्वता दिखाई दे रही है, बल्कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान को भी सम्मान दिया जा रहा है। यही वजह है कि विंध्य के बड़े आदिवासी नेता और पांचवीं बार के विधायक बिसाहू लाल सिंह भी आश्वस्त हैं कि उन्हें भी पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी। मंत्रिमंडल में नाम नहीं आने से थोड़े दुखी नजर आ रहे बिसाहू लाल को राहुल गाँधी के निर्णय का इन्तजार है।