कमलनाथ ने अपने मंत्रियों को बनाया पावरफुल

प्रत्येक विभाग की समीक्षा में बैठेंगे 28 मंत्री, प्रमुख सचिव और विभाग के महत्वपूर्ण अधिकारी

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास

मुख्यमंत्री सचिवालय ही
सत्ता का केंद्र नहीं रहेगा

मुख्यमंत्री जी धन्यवाद

मुध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फैसला कर लिया है कि अब मुख्यमंत्री सचिवालय को सत्ता का एकमात्र केंद्र मानने वाले नौकरशाहों को पता होना चाहिए कि कमलनाथ के मंत्रिमंडल में सभी 28 मंत्री पॉवरफुल हैं। उन्होंने आज मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मंत्रालय में मुख्यसचिव से लेकर सभी नौकरशाहों और अपने मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों का एक-दूसरे के साथ कुछ इस अंदाज में परिचय कराया जिसमें हर नौकरशाह को अपना नाम बताना पड़ा, विभाग बताने पड़े और यह भी बताना पड़ा कि वह नौकरशाह उक्त विभाग में कितने वर्षों से पदस्थ हैं। मुख्यमंत्री ने वर्षों पुराने ढर्रे को समाप्त करते हुए यह निर्णय किया है कि जब भी किसी विभाग की समीक्षा होगी तो उस विभाग के प्रमुख सचिव तथा महत्वपूर्ण सभी अधिकारियों के साथ मंत्रिमंडल के 28 सदस्य भी मौजूद रहेंगे। यह नई परंपरा मध्यप्रदेश में संभवत: पहली बार लागू की गई है जिससे मंत्रियों के महत्व को सुनिश्चित करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। विभाग के अधिकारी अपने मंत्रियों को ही जानकारी देंगे और मंत्रियों के माध्यम से ही मुख्यमंत्री वह सारे फैसले लेंगे जो मंत्रियों की रिपोर्ट में उनको बताई जाएगी। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि मंत्रियों को किसी मुख्यमंत्री ने इतना पॉवरफुल बनाया हो। पूरे मंत्रालय में आज मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली की नई परंपरा से हड़कंप मच गया है। कैबिनेट मंत्री गोविंद राजपूत तो इतने भावुक हो गए कि पहली बार मध्यप्रदेश में मंत्रियों का महत्व और बढ़ता हुआ कद देखकर उन्होंने मुख्यमंत्री को हृदय से धन्यवाद दिया। सूत्रों के अनुसार गोविंद राजपूत ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्रियों के ऊपर मुख्यमंत्री ने जो विश्वास जताया है हम सब उनके विश्वास और चुनौतियों पर खरा उतरेंगे तथा कोशिश करेंगे मंत्रियों की कार्यप्रणाली से कांग्रेस सरकार की छबि सकारात्मक बनी रहे। गुरुवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में 28 मंत्रियों ने बकायदा भागीदारी की और जब मुख्यमंत्री ने विभाग के प्रमुख सचिव आईसीपी केशरी से पूछा कि ट्रांसफार्मर यदि खराब होता है तो उसके बदलने के नियम क्या हैं। श्री केशरी ने जब यह जवाब दिया कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार ने खराब ट्रांसफार्मरों को तीन दिनों में बदलने का आदेश जारी किया था जो प्रचलन में है। तब मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों से पूछा कि क्या ऐसा हो रहा है तो किसी मंत्री ने यह उत्तर नहीं दिया कि तीन दिनों के अंदर ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं, बल्कि दबी जुबान से किसी मंत्री ने यह कह दिया कि 10-15 दिन तक भी ट्रांसफार्मर बदले नहीं जाते। तब मुख्यमंत्री नाराज हुए और कहा कि ऐसा नहीं चलेगा जो नियम है उसे कड़ाई से लागू किया जाए और किसी भी मंत्री द्वारा यदि यह सूचित किया जाता है कि क्रियान्वयन में कोई कमी है उसे तत्काल पूरा किया जाए वरना जिम्मेदार अधिकारी चाहे कलेक्टर हो या कितना भी बड़ा अधिकारी हो उसे बदल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा आहुत आज की अनौपचारिक बैठक मंत्रियों एवं नौकरशाहों के बीच में जरूर संपन्न हुई लेकिन कमलनाथ की यह पाठशाला मध्यप्रदेश में शासन अब कैसा चलेगा यह संदेश देने में पूरी तरह कामयाब हो गई।