मंत्रियों के विभागों का बंटवारा दिल्ली पंहुचा

विजय कुमार दास
नई दिल्ली, 27 दिसंबर। कमलनाथ मंत्रिमंडल का विस्तार भले ही हो गया हो लेकिन विभागों का बंटवारा अब तक नहीं हो पाया है। विभागों को लेकर अब भी पार्टी में माथापच्ची जारी है और फैसला नहीं हो पा रहा है कि किसे कौन-सा विभाग दिया जाए। खबर है कि तीन विभागों (वित्त, गृह और परिवहन) को लेकर सांसद सिंधिया, मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह में मामला उलझ कर रह गया है। अब ये मामला दिल्ली दरबार में पार्टी आलाकमान के पास पहुंच गया है। मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार सभी मंत्रियों को कैबिनेट का दर्जा देने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती के रूप में विभागों का बंटवारा सामने आ रहा है। मंत्रियों के शपथ ग्रहण के दो दिन बीत जाने के बाद भी मंत्रियों को मिलने वाले विभागों पर मंथन जारी है। अब मामला दिल्ली दरबार पहुँच गया है और बताया जा रहा है कि राहुल गाँधी ने इसके लिए अहमद पटेल को जिम्मेदारी सौंपी है और उम्मीद जताई जा रही है कि विभाग बंटवारे में भी पटेल अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके पहले भी जब ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने गुट के लिए उपमुख्यमंत्री का पद हासिल करने पर अड़े थे तब पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल ने इसे सुलझाया था। अब इस बार गृह विभाग के मसले को लेकर भी सिंधिया गुट ने अहमद पटेल से ही बात की है। बताया जा रहा है कि कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच वित्त, गृह और परिवहन विभाग को लेकर पेंच फंसा हुआ है। अब यह मामला पार्टी आलाकमान के पास पहुंच गया है। सिंधिया जहां गृह और परिवहन विभाग तुलसी सिलावट को दिलवाना चाहते हैं, वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ की पसंद राजपुर विधायक बाला बच्चन हैं। अनुभव और वरिष्ठता का हवाला देकर दिग्विजय सिंह डॉ. गोविंद सिंह को गृह विभाग दिलाने पर अड़े हैं। इसके अलावा दिग्विजय सिंह अपने बेटे और राघोगढ़ के विधायक बने जयवर्धन सिंह को वित्त विभाग देने की वकालत कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंत्रिमंडल के गठन से पहले कहा था कि मंत्री और राज्यमंत्री के बीच काम का बंटवारे के बीच विकास कार्यों में देरी होती है। लिहाजा उन्होंने यह सुझाव दिया था कि मंत्री ही विभाग का सर्वेसर्वा हो, ताकि काम आसानी से हो सके। कमलनाथ ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि मंत्रालय मुख्यमंत्री कार्यालय नहीं बल्कि मंत्री चलाएंगे। सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ ने विभाग बंटवारे को लेकर देर रात सिंधिया से चर्चा की। विभागों के बंटवारे को देखते हुए दिग्विजय सिंह ने दिल्ली के कार्यक्रम को रद्द कर दिया। मुख्यमंत्री ने उनकी सभी पहलुओं पर लंबी चर्चा हुई। कमलनाथ ने साफतौर पर कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी को प्रदेश में लोकसभा चुनाव के बेहतर परिणाम चाहिए तो उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर फ्री हैंड मिलना चाहिए। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के कोटे से मंत्री बने कमलेश्वर पटेल, जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जा सकते हैं। साथ ही नाराज चल रहे विधायकों की नाराजगी भी विभाग बटंवारे में देरी की बड़ी वजह मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचे बिसाहू मंत्री नहीं बनाए जाने से रोने लगे। वरिष्ठ विधायकों केपी सिंह, बिसाहूलाल सिंह और ऐदल सिंह कंसाना की नाराजगी का मामला एक-दो दिन में निपटाया जा सकता है। इसके बाद ही विभागों का बंटवारा होगा।
सूत्रों की मानें तो जयवर्धन को वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। जयवर्धन ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से माइक्रो फाइनेंस में एमबीए किया है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि वित्त विभाग मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने पास रख सकते हैं। इसके अलावा गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी बाला बच्चन को दी जा सकती है। वहीं सज्जन सिंह वर्मा और तरुण भनोत के बीच नगरीय प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभागों का बंटवारा हो सकता है। गोविंद सिंह को राजस्व, उमंग सिंघार को वन, जीतू पटवारी को युवा एवं खेल मंत्रालय, ओंकार मरकाम को आदिम जाति कल्याण और हर्ष यादव को नवकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय दिया जा सकता है। विजयलक्ष्मी साधौ को महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
कमलनाथ मंत्रिमंडल की औसत उम्र 52 वर्ष
कमलनाथ मंत्रिमंडल की औसत उम्र 52 साल है, इस बार मुख्यमंत्री कमलनाथ ने युवा चेहरों को मौका मिला है, जबकि शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 23 सदस्यों का मंत्रिमंडल बनाया था, जिसमें चार राज्यमंत्री थे। इस मंत्रिमंडल की औसत उम्र 60 वर्ष थी। कमलनाथ सरकार के 28 मंत्रियों की औसत उम्र 52 साल है। दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह सिर्फ 32 वर्ष के और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के भाई सचिन यादव महज 36 वर्ष के हैं। दोनों दूसरी बार विधायक चुने गए हैं।