मतलब 2019 लोकसभा जीतने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जनसंपर्क विभाग भी अपने पास ही रखा …

विशेष संपादकीय- विजय कुमार दास

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज अपने मंत्रिमंडल के 28 सदस्यों के विभागों का बंटवारा जिस आधार पर किया है, उसे देखने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ राजनीति में जितने पारंगत हैं, उससे ज्यादा प्रशासनिक संतुलन बनाने में उनको महारथ हासिल है। मुख्यमंत्री ने आज विभागों का बंटवारा जिस आधार पर किया है, उसमें यह स्पष्ट संकेत है कि विकास और सरकार की सकारात्मक छबि को निर्मित करने वाले अनुभवी मंत्रियों को भारी-भरकम विभागों से नवाजा गया है। पिछली भाजपा सरकार जिस सिंचाईं के रकबे और सड़कों के निर्माण का गुणगान करती आई है ऐसे विभाग उन्होंने अपने विश्वसनीय सहयोगी सज्जन सिंह वर्मा और हुकुमसिंह कराड़ा को देकर यह साबित कर दिया है कि मध्यप्रदेश में विकास की गति कुछ ही समय में दुगुनी हो जाएगी। जहां तक सवाल है कानून और व्यवस्था का उसमें उन्होंने विश्वसनीय बाला बच्चन को देकर उनकी वरीयता का ध्यान रखा है। मुख्यमंत्री ने गुटीय संतुलन में सर्वाधिक महत्व ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के चहेतों को दिया है। यूं कहा जाए कि गोविंद सिंह राजपूत को राजस्व और परिवहन, तुलसी सिलावट को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण देकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को संतुष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, जबकि पूर्व पीसीसी अध्यक्ष अरुण यादव के छोटे भाई सचिन यादव को कृषि विभाग देकर उनके स्व. पिता सुभाष यादव की पसंद पर मुहर लगाई है। ठीक इसी तरह दिग्विजय सिंह के बेटे जयवद्र्धन सिंह को भी नगरीय विकास एवं आवास विभाग देकर बेहतर ढंग से नवाजा गया है। जहां तक सवाल है सुरेश पचौरी के गुट का उसमें डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ को वरीयता में सबसे पहले ऊपर रखते हुए और तरुण भनोट को वित्त विभाग का भार सौंपते हुए उन्हें भी संतुष्ट कर लिया गया है। पूरे मंत्रिमंडल में चौंकाने वाला महकमा प्रदीप जायसवाल के पास है, जो एक निर्दलीय विधायक हैं, अब वे शिवराज सरकार के समय रेत के अवैध उत्खनन को लेकर उठे बवाल को सम्हालेंगे और नई नीति बनाकर सहकारिता के माध्यम से कांग्रेस के समर्थक कार्यकताओं को तथा ग्राम पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में नई नीति बनाएंगे। जहां तक सवाल है मुख्यमंत्री कमलनाथ के नियंत्रण में सुरक्षित रहने वाले विभागों का तो उसमें औद्योगिक नीति, तकनीकी शिक्षा, रोजगार विभाग के साथ-साथ जनसंपर्क विभाग एक ऐसा महकमा है, जो कांग्रेस की सत्ता में आने के पहले जनता से दिए गए वचन पत्र को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार जब अच्छा काम करती है तब उसका सकारात्मक प्रचार आम जनता तक किस तरह पहुंचे यह जनसंपर्क विभाग ही सुनिश्चित करता है। संभवत: मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में 29 में से कम से कम 19 सीटों के जीतने के लक्ष्य को निर्धारित करने के लिए जनसंपर्क विभाग अपने पास रखा है, यह कहा जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा। समझा जाता है कि जनसंपर्क विभाग और गृह विभाग को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया में काफी जद्दोजहद भी हुई, और तो और कुछ मंत्रियों की चाहत भी थी कि उन्हें अन्य विभागों के साथ जनसंपर्क मिल जाता तो अच्छा रहता। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जनसंपर्क विभाग के महत्व को गंभीरता से लेते हुए अपने पास इसलिए रखा है कि सरकार की सकारात्मक छबि और उसके अच्छे काम आम जनता तक गांव-गांव में भी पहुंचे। यदि सकारात्मक प्रचार-प्रसार कमलनाथ सरकार का लक्ष्य होगा तो पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के जमाने में चलाई गई प्रचार रथ के बस पर सवार होकर अब जनसंपर्क महकमे के अधिकारी गांव-गांव भी जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा। इस संपादकीय का लब्बेलुआब स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री के रुप में कमलनाथ केवल अच्छे प्रशासक की छबि तक सीमित नहीं रहना चाहते, वे चाहते हैं कि मध्यप्रदेश में यदि उन्हें विकास पुरुष के रुप में पुकारा जाए तो वे यह भी कहलाने का हक रख सकते हैं कि आज की तारीख में 135 वर्ष पुरानी कांग्रेस में एक सशक्त एवं सफल राजपुरुष भी हैं।