माखनलाल विवि में संघ कृपा-पात्रों पर गिर सकती है नाथ की गाज

मुख्यमंत्री ने तलब किया नियुक्तियों का लेखा-जोखा

अंसार खान
भोपाल, 29 दिसंबर। कथित रूप से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व भाजपा के गहरे प्रभाव का निरंतर आरोप झेलने वाला शैक्षणिक संस्थान माखलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में की गयी पिछले 12 वर्षों की नियुक्तियों व पदोन्नतियों का लेखा-जोखा जबसे मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा तलब किया गया है, तबसे ही विवि में पदस्थ कथित रूप से आरएसएस व भाजपा के कृपा-पात्र कहलाए जाने बाले विवि स्टाफ में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। ज्ञात हो कि विवि के पूर्व कुलपति प्रोफेसर बीके कुठियाला के समय हुई नियुक्तियों व पदोन्नतियों में अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार का मामला लोकायुक्त से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच चुका था तो दूसरी ओर वर्तमान में विवि रजिस्ट्रार के पद पर पदस्थ प्रो. संजय द्विवेदी पर भी आरएसएस के करीबी होने के साथ ही विधानसभा चुनाव के समय भाजपा के लिए कैम्पेनिंग करने तक के आरोप लग चुके हैं, वहीं विवि के वर्तमान कुलपति जगदीश उपासने भी संघ के करीबी होने के आरोपों से बच नहीं सके। उनके द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के संदर्भ मे किये गये ट्विटर मामले में एनएसयूआई ने उनका पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया था। ज्ञात हो कि विवि की महापरिषद् के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं, तो ऐसे में उनके द्वारा मंगाये गये नियुक्तियों के सम्बंधित रिकार्ड संघ कृपा-पात्रों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। चूंकि 2003 में भी दिग्विजय सरकार के समय कुलपति रहे शरदचंद्र को प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद कुलपति पद से त्यागपत्र देना पड़ा था।
लोकायुक्त ने जांच करने से कर दिया था मना: वर्ष 2012 में कांग्रेस द्वारा जब नियुक्तियों में अनियमितताओं व ढाई करोड़ के घोटाले की शिकायत के साथ ही लोकायुक्त को तर्क दिया था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनरल काउंसिलिंग की बैठक बुलाए बगैर ही नियुक्तियां कर दी हैं, तब लोकायुक्त ने यह कहते हुए कि कुलपति लोकसेवक की परिभाषा में नहीं आते, इसलिए जांच नहीं की जा सकती तो दूसरी ओर संघ व भाजपा के कृपा-पात्रों को उपकृत करने के विरूद्ध पूर्व में जनहित-याचिका उच्च न्यायालय जबलपुर में भी दायर की जा चुकी है।

गड़बडिय़ोंं के मुख्य आरोप
> पूर्व कुलपति कुठियाला द्वारा नियमों व योग्यताओं को ताक पर रख चहेतों को पदों पर नियुक्ति व पदोन्नति।
> स्नातक व स्नातकोत्तर सहित भर्ती परीक्षा में संघ से जुड़े पाठ्यक्रम को शामिल करना।
> पूर्व मुख्यमंत्री की पर्चियों के आधार पर संविदा नियुक्तियां।
> संघ व भाजपा से जुड़े छात्रों को जॉब प्लेसमेंट में प्रमुखता से आगे रखना।
> विवि के निर्माण व विज्ञापन सहित नियुक्तियों में भ्रष्टाचार व धांधली का आरोप।