कमलनाथ ने सुधि रंजन मोहंती को बनाया मुख्य सचिव

भाजपा ने काम लिया, परेशान भी खूब किया, लेकिन कांग्रेस के मुख्यमंत्री

विशेष रिपोर्ट
विजय कुमार दास
मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज अंतत: 1982 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष सुधि रंजन मोहंती को मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव पद से नवाजते हुए आदेश जारी कर दिया है। सूत्रों के अनुसार मोहंती को वर्तमान मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह के 31 दिसंबर, 2018 को रिटायर होने के साथ शाम 5 बजे मुख्य सचिव का कार्यभार सौंप दिया जाएगा। 15 साल सत्ता से बाहर रहने वाली कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सुधि रंजन मोहंती को मुख्य सचिव बनाने के लिए कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं से पहले रायशुमारी की और विधि विशेषज्ञों से बातचीत करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि दो-तीन दिन पहले केट के फैसले का मोहंती के कैरियर में कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है। इसलिए मोहंती को मुख्य सचिव बनाने में संकोच नहीं करना चाहिए।
बताया जाता है कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुख्यमंत्री ने सलाह-मशवरा करने के बाद यह निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सरकार में कई बार ऐसे मौके आए, जब मोहंती की फाइल को हरी झंडी दी जा सकती थी। लेकिन मोहंती के प्रतिद्वंद्वियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि यदि मोहंती की फाइल को पदोन्नति के लिए स्वीकृत किया जाएगा तो संदेश गलत जाएगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि मोहंती उन अधिकारियों में से हैं, जो परिणाम देने में और प्रशासन के निर्णय को सकारात्मक स्वरूप देने में मास्टर माइंड आईएएस अधिकारी हैं। इसलिए शिवराज सरकार ने उनसे कई बड़ी-बड़ी योजनाओं को लेकर खूब काम करवाए और शिवराज सिंह चौहान की कोठरी ने मोहंती को इतना परेशान किया कि उनकी अच्छे गुड गवर्नेंश के नाम से जो ख्याति थी, वह समाप्त कर दी गई।
बड़ी मुश्किल से सचिव से प्रमुख सचिव तक की पदोन्नति का सफर तय करने में सुधि रंजन मोहंती को पूरे-पूरे नौ वर्ष लगे। कभी-कभी तो मोहंती ने और उनके परिवार ने निराशा का वह दौर भी देखा, जब उन्हें ऐसा लगा कि अब सरकार उनके साथ न्याय नहीं करने वाली है, तब उन्होंने नौकरी छोडऩे का इरादा भी तय कर लिया था, परंतु दृढ़ इच्छा शक्ति और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नन्दिनी मोहंती का संबल शायद मोहंती के लिए रामबाण साबित हुआ।
शिवराज सरकार को भी थक-हारकर मोहंती की काबिलियत स्वीकारनी पड़ी और मोहंती अतिरिक्त प्रमुख सचिव के पद पर मुख्य सचिव के समकक्ष पदोन्नत किए गए तथा माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष बनाए गए। यह बात तय है कि यदि शिवराज सरकार मध्यप्रदेश में चौथी बार सत्तारूढ़ हो जाती तो सुधि रंजन मोहंती भाजपा की सरकार में कभी मुख्य सचिव नहीं बन पाते। यूं कहा जाए कि कांग्रेस में यदि कभी हार का मुंह नहीं देखने वाले कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला तो वह उनके राजनीतिक जीवन का आखिरी मौका था। ठीक इसी तरह मोहंती के भाग से कांग्रेस की सरकार बन गई और आज मोहंती मुख्य सचिव के रूप में अपना खिला-खिला चेहरा लेकर कल से मंत्रालय में जब प्रवेश करेंगे, तब उनके पास गुलदस्तों और बधाइयों का तांता जरूर होगा।