भाजपा में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज

प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में नरोत्तम,प्रहलाद व कैलाश के नाम आगे

हृदेश धारवार,9755990990

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद प्रदेश भाजपा संगठन में बड़ेे फेरबदल की अटकलें तेज हो गई है। सूत्रों की माने तो संघ ने भी इसके लिए हरी झंडी दे दी है। चुनाव में मिली हार के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री सुहास भगत की भूमिका पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। भाजपा में जब से सुहास भगत को संगठन महामंत्री बनाया गया है भाजपा को लागातार हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि सुहास भगत को मजबूत करने के लिए संभागीय संगठन मंत्री रहे अतुल राय को प्रदेश भाजपा सह संगठन मंत्री नियुक्त किया गया था,लेकिन वे भी कुछ कमाल नहीं दिखा सके। इनके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जिस विश्वास के साथ राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी थी वे भी अमित शाह के विश्वास पर खरे नहीं उतर सके। राकेश स्वयं अपना गढ़ बचाने में सफल नहीं हो सके । इस बार भाजपा को महाकौशल में 38 में से मात्र 13 सीटें ही मिली है। जबकि 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 25 सीटें मिली थी। राकेश सिंह नेतृत्व में भाजपा को इस बार 15 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष रहे कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस को इस बार 25 सीटें मिली है। इस उलटफेर को लेकर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने राकेश सिंह की भूमिका पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिए हैं। हालांकि राकेश सिंह ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को इस्तीफे की पेशकश थी,लेकिन उन्होंने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। लेकिन अब यह माना जा रहा कि भाजपा में बड़े स्तर पर परिवर्तन किए जा सकते है। भाजपा अध्यक्ष के तौर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, सांसद प्रहलाद पटेल व पूर्व में अध्यक्ष पद की रेस में पिछड़ चुके नरोत्तम मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। इनके अलावा प्रदेश संगठन महामंत्री के तौर पर राजकुमार मटाले या हितानंद शर्मा को प्रदेश संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता को इस बात का अंदेशा नहीं था कि मध्यप्रदेश की सत्ता भाजपा के हाथों से खिसक जाएगी। चुनाव में हार के बाद बड़े स्तर पर संगठनात्मक सर्जरी की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है जसे जल्द ही अंजाम दिया जा सकता है।
सुहास भगत इसलिए रहे नाकाम: भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत के व्यवहार को लेकर हमेशा से कार्यकर्ताओं में नाराजगी रही है। कार्यकर्ताओं के साथ संवाद नहीं होने की वजह से भी पार्टी के कई पदाधिकारी इस बार चुनाव में आखिरी वक्त में पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हो गए। पूर्व में जब अरविंद मेनन प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री थे तब यह स्थिति नहीं थी। उनके मुकाबले सुहास भगत बेहद कमजोर संगठन महामंत्री साबित हुए हैं। सुहास भगत को मजबूत करने के लिए अतुल राय को प्रदेश सह संगठन महामंत्री बनाया गया था लेकिन वे भी निष्कृय रहे। जिसकी वजह से भाजपा को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।