गैमन में हुए घोटाले पर नकेल कसने की तैयारी
सुनील दत्त तिवारी
भोपाल, 3 जनवरी। राजधानी के सबसे पाश इलाके टीटी नगर में चल रहे गैमन प्रोजेक्ट को लेकर नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह के तल्ख तेवरों से अधिकारी सकते में हैं। दरअसल भूखंड आवंटन से लेकर अभी तक गैमन इंडिया प्रोजेक्ट का विवादों से ही नाता रहा है, जिसे लेकर कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में बड़ी आक्रामक रही है। कई बार विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों ने प्रश्न के माध्यम से हो रही अनियमितताओं पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगना चाहा लेकिन हर बार अधिकारियों की मिलीभगत से मामले पर लीपापोती का प्रयास किया जाता रहा है। अब जबकि विभाग के युवा और कद्दावर मंत्री जयवर्धन सिंह ने गेमन प्रोजेक्ट में हो रहे विलंब के संबंध में उन्हें पूरी वस्तु-स्थिति से अवगत कराने और इस संबंध में पूरा प्रेजेंटेशन देखने की मंशा व्यक्त की है तो अब विभागीय अधिकारियों को बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। टीटी नगर रीडेन्सीफिकेशन योजना के तहत सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक प्रोजेक्ट की रिपोर्ट पर तत्कालीन वित्त मंत्री जयंत मलैया की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रिपोर्ट में सिफारिश थी कि गेमन इंडिया लिमिटेड से 1.65 लाख रुपए प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी वसूली जाए। इसमें हर साल 10 प्रतिशत का इजाफा किया जाना उचित है। यह प्रोजेक्ट मार्च 2013 में पूरा होना था, लेकिन इसकी डेड लाइन खत्म हुए पांच साल से अधिक का वक्त हो गया है। योजना के लिए बनी साधिकार समिति ने निर्माण एजेंसी को तीन साल की मियाद बढ़ाकर राहत दी थी, लेकिन वर्ष 2016 में भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया। इसके लिए राज्य सरकार ने कमेटी बनाई थी। जिसमें नगरीय विकास एवं आवास मंत्री माया सिंह और राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता को सदस्य बनाया था। कमेटी ने सिफारिश में शर्त रखी है कि निर्माण एजेंसी को परफार्मेंस गारंटी के लिए बैंक गारंटी की वैधता फरवरी 2019 तक बढ़ाए जाने की कार्यवाही तीन माह के भीतर यानी नवंबर 2018 तक पूरी होना चाहिए। इसके बाद ही लीज की जमीन को फ्री होल्ड किया जा सकेगा। लेकिन आज भी गैमन का काम पूर्णता की तरफ नहीं है और न ही उससे पैनाल्टी वसूल की जा सकी है। इसके पहले भी आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि आश्चर्यजनक रूप से 2013 में प्रोजेक्ट पूर्ण होने के कुछ समय पूर्व ही गैमन इण्डिया द्वारा बीजेपी को पूर्णता गैरकानूनी रूप से 25 लाख रूपये का चन्दा दिया गया और इससे बाद ही सरकार द्वारा 2 साल के लिए गैमन इंडिया को राहत दी गई। तत्कालीन नियम अनुसार कोई कंपनी अपने 3 वर्ष के फायदे के औसत का 7.5 प्रतिशत ही चंदे में दे सकती थी। वर्ष 2009-10, 2010-11, 2012-13 में गैमन इंडिया को औसत मुनाफा (-) 56.9 करोड रहा है, यानि गैमन को घाटा हुआ, फिर भी उसके द्वारा भाजपा को वर्ष 2012-13 में 25 लाख का चंदा दिया है, जो कि कानून का सीधा उल्लंघन था।