अब किसानों के 12 दिसंबर 18 तक के कर्ज होंगे माफ

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने समझा किसानों का दर्द
कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव को मिली मंजूरी

प्रशासनिक संवाददाता
भोपाल, 5 जनवरी। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने किसान कर्ज माफी के लिए निर्धारित की गई समय-सीमा को बढ़ा दिया है। यह जानकारी पत्रकारों को देते हुए जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा और उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने बताया कि अब किसानों के 12 दिसंबर, 2018 के तक के 2 लाख रूपए के कर्ज माफ किए जाएंगे। इस प्रस्ताव पर कमलनाथ कैबिनेट ने भी अपनी मुहर लगा दी है। उन्होंने बताया कि कर्ज माफी के अलावा कैबिनेट की बैठक में कन्यादान सामूहिक विवाह योजना के तहत मिलने वाली 28,000 रुपए की राशि को बढ़ाकर 51 हजार रुपए देने का फैसला भी लिया गया। हालांकि यह राशि सिर्फ सामूहिक विवाह आयोजन के दौरान ही दी जाएगी। वहीं आदिवासी और जनजाति अंचलों में प्रचलित विवाह प्रथाओं और एकल विवाह के दौरान भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
कैबिनेट बैठक के बाद जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा और खेल एवं युवक कल्याण व उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने बताया कि सरकार ने किसान कर्ज माफी की समय अवधि बढ़ाकर 12 दिसंबर, 2018 कर दी है। इसके पहले 31 मार्च, 2018 तक के किसानों का कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया था। साथ ही उन्होंने बताया कि 22 फरवरी से किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र मिलने शुरू हो जाएंगे। इसके लिए किसानों को ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन करना होगा, वे बैंक में भी आवेदन कर सकेंगे। प्रदेश के 55 लाख किसानों को कर्ज माफी का लाभ मिलेगा, इसमें 35 हजार लघु, सीमांत कृषक भी हैं, जिन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें सहकारी, राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्ज भी शामिल होंगे।
कर्ज माफी के लिए बनाई गईं तीन श्रेणियां
मंत्री पटवारी ने बताया कि कर्ज माफी योजना के लिए तीन श्रेणियां बनाई गई हैं, पहला, ऐसे किसान जो आधार पंजीकृत हैं, दूसरा गैर आधार पंजीकृत किसान और तीसरे ऐसे किसान जिनके पास सरकारी दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन उन पर बैंकों का ऋण बकाया है। इन सभी किसानों से अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से फॉर्म भरवाए जाएंगे और सूची तैयार कर उस पर दावे आपत्ति भी बुलाई जाएगी। जीतू पटवारी ने बताया कि 25 जनवरी से ग्राम सभाओं की बैठक में बैंकों की सूचियां प्रकाशित होंगी, जबकि 5 फरवरी से ग्राम पंचायतों में फॉर्म चस्पा किए जाएंगे। 22 फरवरी से ऋ ण मुक्ति के प्रमाण पत्र का वितरण का काम शुरू होगा और किसानों की खातों में ऋ ण मुक्ति का पैसा पहुंचना शुरू हो जाएगा। मंत्री पटवारी ने दावा किया कि देश के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी कर्ज माफी की योजना साबित होगी। सरकार की इस योजना के इस योजना से मध्यप्रदेश के करीब 55 लाख किसान लाभान्वित होंगे। लेकिन, इस योजना के क्रियान्वयन पर करीब 50 हजार करोड़ का मध्य प्रदेश सरकार पर भार आएगा।
मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना के तहत किसानों के 2 लाख रूपये तक के ऋण माफ करने का निर्णय लिया गया। योजना में 31 मार्च 2018 तक के ऋण माफ होंगे और 12 दिसम्बर 2018 तक ऋण पटाने वाले किसान लाभान्वित होंगे। एक अप्रैल 2007 को अथवा उसके बाद ऋण प्रदाता संस्था से लिये गये फसल ऋण को इसमें शामिल किया गया है। योजना में सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा राष्ट्रीयकृत बैंक से फसल ऋण प्राप्त करने वाले किसानों को अधिकतम 2 लाख की सीमा तक योजना पात्रतानुसार लाभ देने का निर्णय लिया गया।
ऐसे किसान जिन पर 31 मार्च, 2018 की स्थिति में रेगुलर आउट-स्टेंडिंग लोन और एनपीए/कालातीत लोन था तथा जिन किसानों ने दिनांक 12 दिसम्बर, 2018 तक पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से कृषि ऋण पटा दिया है, उन्हें भी योजना का लाभ दिया जाएगा। प्राथमिक कृषि साख समितियों द्वारा दिये गये अल्पकालीन फसल ऋण भी योजना में शामिल रहेंगे। योजना के दायरे में भूतपूर्व सैनिक शामिल रहेंगे। योजना का लाभ लगभग 55 लाख कृषकों को मिलेगा। इसमें लघु और सीमांत 37 लाख कृषकों को प्राथमिकता से ऋण माफी का लाभ मिलेगा।
प्रत्येक विकासखंड में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत योजना के क्रियान्वयन के लिये जिम्मेदार होंगे। सूची के प्रकाशन के बाद आधार कार्ड सीडेड सूची (हरी सूची) के किसानों से हरे रंग के आवेदन-पत्र तथा गैर आधार कार्ड सीडेड सूची (सफेद सूची) के किसानों से सफेद रंग के आवेदन-पत्र ग्राम पंचायत में सूची चस्पां होने के बाद ग्राम पंचायत कार्यालय में ऑफ लाइन प्राप्त किये जायेंगे। दोनों सूची में शामिल नहीं होने वाले किसान गुलाबी रंग के आवेदन-पत्र में आवेदन कर सकेंगे। तीनों किस्म के आवेदन-पत्र की जानकारी 26 जनवरी 2019 को ग्राम सभा की बैठक में दी जाएगी।
कर्जमाफी की समय-सीमा बढ़ाना किसानों की जीत: पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसान कर्जमाफी के लिए 31 मार्च 2018 तक की समय सीमा बढ़ाकर 12 दिसंबर, 2018 किया जाना हमारे संघर्षों की और किसान भाइयों की जीत है। इसके साथ में उन्होंने पाला गिरने से हुए नुकसान की भरपाई की भी मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट बैठक में कर्जमाफी के प्रस्ताव को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है किसान कर्जमाफी के लिए 31 मार्च 2018 तक की समय सीमा बढ़ाकर 12 दिसंबर, 2018 किया जाना हमारे संघर्षों की और किसान भाइयों की जीत है। अब मेरी मांग है कि सरकार पूरे प्रदेश में जहाँ-जहाँ पाला गिरने से फसलों का नुकसान हुआ है, उस की भरपाई के लिए भी तुरंत कार्रवाई करे।