15वीं विधानसभा का पहला सत्र आज से

शपथ, विधानसभा अध्यक्ष का निर्वाचन और होगा राज्यपाल का अभिभाषण

विशेष संवाददाता
भोपाल, 6 जनवरी। मध्य प्रदेश की पंद्रहवीं विधानसभा का प्रथम सत्र सोमवार, 7 जनवरी को 11 बजे से प्रारंभ होकर शुक्रवार 11 जनवरी तक चलेगा। इस सत्र में मौन धारण करना, मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित सदस्यों की सूची पटल पर रखना, सभापति तालिका की घोषणा और शपथ व प्रतिज्ञा की कार्रवाई होगी। जानकारी के अनुसार निर्वाचित सदस्यों को प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना द्वारा शपथ व प्रतिज्ञा दिलाई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष का निर्वाचन और प्रदेश के राज्यपाल का अभिभाषण के साथ शासकीय कार्य भी होंगे।
प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि इस सत्र में अभी तक 203 विधायकों ने आज तक पंजीयन कराया है। नवनियुक्त विधायकों के सचिवालय में बनाये गए स्वागत कक्ष का कार्य इस सत्र अवधि तक जारी रहेगा। जहां शेष बचे 27 विधायक पंजीयन करा सकेंगे। प्रमुख सचिव ने इस प्रथम सत्र की तैयारियों का जायजा लिया। इस सत्र में सुरक्षा के दौरान विधान सभा सचिवालय में आने वाले आगन्तुकों और पत्रकारों एवं अन्य मीडिया कर्मियों के लिए प्रवेश-पत्र जारी किये गए हैं, उनको सुरक्षा दृष्टि से अपने साथ फोटो पहचान पत्र के रूप में (आधार कार्ड, वोटर आई.डी. कार्ड, ड्राइविंग लायसेंस, पेन कार्ड, पासपोर्ट इनमें से कोई एक) लाना आवश्यक है।
आठ को राज्यापाल का अभिभाषण
8 जनवरी को विधानसभा में राज्यपाल का अभिभाषण होगा। परम्परा है कि नई सरकार के पहले विधानसभा सत्र में राज्यपाल का अभिभाषण होता है। 8 जनवरी को होने वाले अभिभाषण में कांग्रेसनीत सरकार को मिले जनादेश का उल्लेख होगा। चूंकि अभी सरकार को बने कुछ ही समय हुआ है, इसलिये इसमें उसकी उपलब्धियों का बखान कम ही होगा। अभिाभषण में किसानों का कर्ज माफ किये जाने और कन्या विवाह योजना में अनुदान राशि 51 हजार रुपये किये जाने का विशेष उल्लेख होगा। अब की बार का अभिभाषण ठीक वैसा ही होगा, जैसा वर्ष 2003 में भाजपा सरकार आने पर हुआ था। तत्कालीन भाजपा सरकार का पहला अभिभाषण 16 दिसम्बर 2003 को हुआ था जिसमें तत्कालीन राज्यपाल रामप्रकाश गुप्त ने कहा था कि मेरी सरकार को प्रदेश की जनता ने जो व्यापक जनादेश दिया है, वह जनसामान्य की इच्छाओं, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतीक है। इस अभिभाषण में पूर्ववर्ती दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की आलोचना की गई थी कि पिछले एक दशक में प्रदेश में बिजली, सडक़ और पानी जैसी अधोसंरचनाओं के क्षेत्रों में विकास सर्वाधिक उपेक्षित रहा है।