गोपाल भार्गव बने नेता प्रतिपक्ष

राजनीतिक संवाददाता
भोपाल, 7 जनवरी। मध्यप्रदेश की पंद्रहवीं विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष भाजपा के वरिष्ठ नेता व 8 बार के विधायक गोपाल भार्गव होंगे। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में हुई विधायक दल की बैठक में नेता प्रतिपक्ष के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गोपाल भार्गव के नाम का प्रस्ताव रखा।
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गोपाल भार्गव के नाम का समर्थन किया। बैठक में भाजपा के सभी विधायकों को आमंत्रित किया गया था। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने गोपाल भार्गव के नाम की औपचारिक घोषणा की। बैठक में प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह सहित भाजपा विधायक दल के सदस्य गण मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष के लिए वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव का नाम संघ की तरफ से प्रस्तावित किया गया था। संघ चाहता है कि विपक्ष मजबूत हो, मजबूर नहीं। यही वजह है कि मजबूत नेता प्रतिपक्ष के तौर पर गोपाल भार्गव को चुना गया है। नेता प्रतिपक्ष को लेकर कांग्रेस पर पहले मैच फिक्सिंग के आरोप लग चुके हैं, संघ नहीं चाहता कि भाजपा पर भी इस तरह के आरोप लगे। नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में वरिष्ठ विधायक व पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह व राजेंद्र शुक्ला के नाम भी थे। लेकिन संघ ने गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था। जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी अपनी मुहर लगा दी।
चुनाव परिणाम के बाद गोपाल भार्गव ने संघ कार्यालय पहुंच कर क्षेत्रीय प्रचारक दीपक विस्पुते से भी मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद से गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष के दावेदार के तौर पर देखा जा रहा था। गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से विधायक हैं। वो इस सीट से 1985 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। वो 8वीं बार विधायक चुने गए हैं। उनका जन्म 1 जुलाई, 1952 में हुआ था। सागर विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति से उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। उसके बाद सागर की रहली विधानसभा सीट से वो विधायक बने और तब से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। रहली सीट बीजेपी की गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर बीजेपी की पकड़ इतनी मजबूत है कि कांग्रेस यहां प्रतीकात्मक रूप से ही अपना उम्मीदवार खड़ा करती है। इस बार उन्होंने कांग्रेस के कमलेश्वर साहू को 26 हजार से ज़्यादा वोटों से हराया। गोपाल भार्गव पिछले 15 साल मंत्री रहे। जिस भी विभाग में वो मंत्री रहे उससे जुड़े विकास काम इस इलाके में हुए हैं। हालांकि उनके नाम के साथ विवाद भी काफी जुड़े हुए हैं। गोपाल भार्गव के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद नरोत्तम मिश्र और भूपेंद्र सिंह पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यदि प्रदेश संगठन में बदलाव किए जाते हैं तो नरोत्तम मिश्रा और भूपेंद्र सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिका में हो सकते हैं। मध्यप्रदेश में सबसे अधिक विधानसभा चुनाव जीतने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के बाद दूसरा नंबर गोपाल भार्गव का आता है। वो ही ऐसे नेता हैं, जो लगातार एक सीट से इतने चुनाव जीत चुके हैं। पार्टी नेता और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे की मौजूदगी में हुई बैठक में उन्हें नये पद के लिए चुना गया। 14वीं विधानसभा में अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष थे। बीजेपी ने इस बार सपाक्स आंदोलन के कारण विधानसभा चुनाव में हुए नुकसान को देखते हुए ब्राह्मण को इस पद के लिए चुना है।